तीन साल की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या में आरोपी की फांसी
तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में जिला अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने मामले को दुर्लभतम की श्रेणी में रखते हुए फांसी की सजा सुनाई और पीड़िता के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
Court : तीन साल की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा
जिला अदालत ने तीन साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉस्को एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने दिया।
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जिला अदालत ने तीन साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉस्को एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने दिया।
आरोपी गगन कुमार के खिलाफ हंडिया थाने में हत्या और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। घटना 12 जून 2020 की शाम की है। मासूम के पिता ने आरोप लगाया था कि आरोपी गगन कुमार जो कि रिश्ते में भाई लगते हैं उनका लड़का है। मासूम को मिठाई दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। रात नौ बजे घर लौटने पर बच्ची नदारद मिली। खोजबीन के बाद गगन के घर के पास सेम के पेड़ के नीचे बच्ची बेसुध अवस्था में मिली थी। वह दम तोड़ चुकी थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने साक्ष्यों को अपर्याप्त बताते हुए आरोपी को कम से कम सजा देने मांग की। बचाव पक्ष ने अदालत में कोई गवाह पेश नहीं किया।
शासकीय अधिवक्ता विनय कुमार त्रिपाठी ने 13 गवाहों की गवाही, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, डीएनए एवं फोरेंसिक साक्ष्यों को अदालत में पेश किया। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि यह जघन्यतम अपराध है। आरोपी ने पारिवारिक विश्वास का फायदा उठाकर मासूम के साथ दरिंदगी की और उसकी हत्या कर दी। इसलिए फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
अदालत ने मामले को दुर्लभतम की श्रेणी में मानते हुए दुष्कर्म और हत्या दोनों में फांसी की सजा सुनाई। साथ ही 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। साथ ही पीड़िता के परिजनों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से दो लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। फोरेंसिक और चिकित्सीय साक्ष्य बने आधार। पोस्टमॉर्टम डॉक्टर बीएन गुप्ता सहित 13 गवाहों की गवाही, डीएनए रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्य ने अदालत में आरोपी का अपराध सिद्ध किया।
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