होमअपराधपुष्कर धामी ने पूरा कर दिया लगातार 5 साल का कार्यकाल, यूसीसी, भू-कानून से लेकर कई बड़ी उपलब्धियां
अपराध

पुष्कर धामी ने पूरा कर दिया लगातार 5 साल का कार्यकाल, यूसीसी, भू-कानून से लेकर कई बड़ी उपलब्धियां

पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के इतिहास में नारायण दत्त तिवारी के बाद लगातार 5 साल का कार्यकाल पूरा किया है. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें यूसीसी (यूनियन मैरिज एंड डिवोर्स (सुधार) अधिनियम), भू-कानून, नकल का कानून, दंगा रोकने का कानून और मदरसा बोर्ड को समाप्त करना शामिल है.

4 जुलाई 2026 को 09:24 am बजे
पुष्कर धामी ने पूरा कर दिया लगातार 5 साल का कार्यकाल, यूसीसी, भू-कानून से लेकर कई बड़ी उपलब्धियां

सौजन्य से:- NDTV Hindi

पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के इतिहास में नारायण दत्त तिवारी के बाद लगातार 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं. 4 जुलाई 2021 को वह राज्य की सत्ता पर काबिज हुए थे. तब से वह दूसरी बार भी मुख्यमंत्री बने. वे अगले 6 महीनों में होने वाले चुनावों में नए जनादेश के लिए जनता के बीच जाएंगे. इस उपलब्धि को वह किस तरह से देखते है, उन्होंने एनडीटीवी को खास इंटरव्यू में बताया.

सीएम पुष्कर धामी का खास Interview

सवाल- लगातार 5 साल और एनडी तिवारी जी का रिकॉर्ड आपने तोड़ा है किस तरह से देखते हैं आप यह एक बड़ी उपलब्धि है? क्योंकि छोटे राज्यों में राजनीतिक अस्थिरता होती है, लेकिन लगातार 5 साल तक मुख्यमंत्री रहना, सबको लेकर साथ चलना, किस तरह से देखते हैं आप इसे?

जवाब- ये जो भी कालखंड पूरा हुआ है, ये उत्तराखंड की जनता के आशीर्वाद से हुआ है और हमारे प्रधानमंत्री आदरणीय मोदी जी के मार्गदर्शन से संभव हुआ है. अनेक चुनौतियां, अनेक परेशानियां, आपदाओं का अवसर उत्तराखंड में हमेशा रहता है, भौगोलिक परिस्थितियां कठिन हैं लेकिन उसके बावजूद हमने सभी चुनौतियों पर कोशिश की है कि हर चुनौती पर बेहतर काम करके दिखाएं और उसमें हम सफल भी रहे हैं.

सवाल- कोई बड़ी उपलब्धि आप बताना चाहें कि जो पिछले 5 साल में आपने की, जिसमें कि लोगों के जीवन में बहुत बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन हो गया हो?

जवाब- अनेक उपलब्धियां राज्य को पहली-पहली बार उत्तराखंड में प्राप्त हुई हैं चाहे वो यूसीसी का कानून हो, पूरे भारत में सबसे पहले लागू करना हो नकल का कानून लागू करना हो, उसके कारण से उत्तराखंड के अंदर 33,000 से भी अधिक हमारे राज्य के नौजवान युवाओं को सरकारी नौकरी पारदर्शिता के आधार पर, योग्यता के आधार पर मिली हैं अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई हुई है, 12,000 एकड़ से अधिक जमीनें अतिक्रमण मुक्त हुई हैं दंगा रोकने का सख्त कानून बनाया है. मदरसा बोर्ड उसको हमने समाप्त करके अल्पसंख्यक शिक्षा में बड़ा सुधार का हम कानून लेकर आए हैं. धर्मांतरण रोकने का कानून बनाया है. एसडीजी इंडेक्स में आज उत्तराखंड पूरे देश में पहले स्थान पर आया है.

सवाल- यूसीसी लागू करने से राज्य के लोगों को क्या फायदा हुआ, इससे क्या ऐसा परिवर्तन हो गया उनके जीवन में, जिससे उनको लगे कि हां, यह बहुत बड़ी उपलब्धि सरकार की है?

जवाब- देखिए, सभी को एक तो जो न्याय मिलने की प्रक्रिया है वो तेज हुई, समानता का अधिकार मिला और मैंने पहले ही कहा था कि उत्तराखंड दो-दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगा हुआ राज्य है, जहां हर परिवार से कोई सेना में है, कोई पैरामिलिट्री फोर्स में है चारों धाम यहां हैं, आदि कैलाश यहां हैं, और गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियां देवभूमि उत्तराखंड उनका उद्गम स्थल है तो यहां पर सभी के लिए एक समान कानून होना चाहिए, देवभूमि का देवत्व बना रहना चाहिए और मुस्लिम महिलाओं को, उनको भी समानता का अधिकार मिले, जो बहुविवाह है, इद्दत है, हलाला है, इस प्रकार की, तीन तलाक जैसी जो कुरीतियां हैं, उन सब से कहीं ना कहीं सम्मान से जीने का अधिकार मिला है.

सवाल- आपने मुस्लिम महिलाओं की बात की तो इससे क्या लगता है आपको कैसे उनको अधिकार मिला? कोई मापने का आपका तरीका है?

जवाब- बिल्कुल मिला है और कुछ मामलों में लोगों ने कहीं ना कहीं जो कानून बना है, उस कानून को ना मानकर आगे बढ़कर उसको तोड़ने का काम करने का प्रयास किया है, तो उस पर कार्रवाई की है हमने. तत्काल कार्रवाई की है, और मुस्लिम महिलाओं के अंदर भी आज एक सुरक्षा का भाव आया है.

सवाल- धामी जी आलोचना होती है यूसीसी की कि यह एक तरह का डिस्क्रिमिनेशन है, क्योंकि यह मुसलमानों के लिए भेदभाव पैदा करने की कोशिश है, उनको निशाना बनाने की कोशिश हो रही है कैसे हिंदुओं को भी कुछ फायदा हुआ यूसीसी बनने से?

जवाब- जब भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में इसका प्रावधान किया गया है, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और उनके साथी जब ये संविधान बना रहे थे, तो उसमें प्रावधान है और समय-समय पर उच्चतम न्यायालय ने भी, चाहे वो सायरा बानो प्रकरण हो या अन्य प्रकरण हो, उन सभी प्रकरणों में राज्यों को निर्देशित किया है कि ये समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए. हम उसी दिशा में आगे बढ़े हैं. हमने संविधान का और उत्तराखंड की जनता ने जो हमको जनादेश दिया, हमने उनसे उनके सामने उनको वचन दिया था कि नई सरकार आएगी तो हमारी सरकार बनते ही हम ये कानून लागू करेंगे.

सवाल- पर इसमें आदिवासियों को बाहर रख दिया गया, अन्य राज्यों में भी यही कहा गया है, केंद्र सरकार की ओर से भी आश्वासन दिया गया है कि आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा?

जवाब- हमारे यहां पर ये परिस्थिति थी कि जो हमारे जनजाति के ट्राइबल्स के लोग थे, उनके बीच में हमारी ड्राफ्ट कमेटी गई थी, उनके सम्मेलन किए थे उन्होंने कहा कि हमें कुछ समय दे दीजिए, और भारत के संविधान में ये प्रिविलेज है, उसके आधार पर उनको प्रिविलेज दिया गया है.

सवाल- जो आपने कई सारी बातें बताईं कि ये उपलब्धियां आपकी हैं, लेकिन एक तरफ विकास भी हो लेकिन उस विकास की कीमत प्रकृति को चुकानी पड़े, तो यह संतुलन कैसे बने, इस पर आप लोग क्या कर रहे हैं, सस्टेनेबल डेवलपमेंट हो?

जवाब- नहीं-नहीं, बिल्कुल देखिए, हम इकोलॉजिकल विकास के पक्षधर हैं और हमारा मॉडल भी वही है कि इकोलॉजी और इकोनॉमी, दोनों का संतुलन होना चाहिए. विकास भी होना चाहिए, हमारी विरासत भी बढ़नी चाहिए, और आज की जो चुनौतियां हैं, उन चुनौतियों के अनुरूप विकास का मॉडल बनना चाहिए, वो हमने अपनाया हुआ है.

सवाल- विकास और विरासत दोनों, यह संतुलन कैसे बनेगा? आपकी यह विरासत तो खैर है ही. उत्तराखंड में देश और विदेशों से हर साल लाखों लोग आते हैं तो उनको भी सब सुख-सुविधाएं मिलें, लेकिन उसकी कीमत पहाड़ों को ना चुकानी पड़े?

सवाल- उसी आधार पर काम कर रहे हैं. आप अब आज आदि कैलाश क्षेत्र में आप जाएंगे, तो सुविधाएं बहुत ज्यादा नहीं हैं जो पहले से जो पुराने समय से बनी हुई चीजें हैं, चाहे होमस्टे बने हुए हैं, होमस्टे जैसे छोटे मकान बने हुए हैं, आज लोग आ रहे हैं, बहुत पसंद कर रहे हैं और हम भी उसी मॉडल को आगे बढ़ा रहे हैं बहुत आधुनिकता ना करते हुए, सुविधा लोगों को मिलनी चाहिए, पहाड़ों में भी विकास होना चाहिए, लेकिन प्रकृति का ख्याल रखते हुए.

सवाल- आपने यह तो आलोचना सुनी होगी कि जो चारधाम के लिए राजमार्ग बनाए जा रहे हैं, इससे पहाड़ों पर असर पड़ रहा है, इसी कारण दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं?

जवाब- जिन लोगों के समय में लंबे समय तक चारधाम जाने के लिए बहुत कठिन मार्ग हुआ करते थे, पहाड़ों में सुविधाएं नहीं होती थीं, और जिनको अब लगता है कि विकास तेज गति से हो रहा है, तो इस प्रकार की मनगढ़ंत बातें करते हैं लेकिन वो सारे मानक होते हैं, आज पर्यावरण के भी मानक हैं, एनजीटी के भी मानक हैं, उन मानकों के आधार पर ही काम होता है. सुरक्षा के मानक भी होते हैं. ये बेबुनियाद बातें हैं. विकास अगर नहीं होगा तो क्या लोग पहाड़ों में क्या करेंगे? तो इसलिए पलायन होगा, आपने देखा कि पलायन होता आया है, उत्तराखंड का तो इतिहास है.

सवाल- आपकी सरकार एनकरेज कर रही है, इसके लिए कुछ योजनाएं वगैरह हैं?

जवाब- हम लोग एनकरेज कर रहे हैं, इसमें अनेक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन दे रहे हैं. हम मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना, पंडित दीनदयाल होमस्टे योजना, ऐसी अनेक योजनाएं हैं. उन योजनाओं के माध्यम से और सब्सिडी का भी हमने प्रावधान किया है. सरकार पूरी तरह से इसको बढ़ा रही है.

सवाल- स्थानीय लोगों की ओर से डिमांड होती थी कि भाई बाहर से लोग ना आएं क्योंकि उनका हक छिनता है इसके लिए आपने कानून भी बनाया, लेकिन फिर भी क्या उसका वायलेशन होता है, उसके कारण शिकायतें आती हैं?

जवाब-  कानून हमने जनता की मांग पर कानून बनाया है, सख्त भूमि का कानून बना दिया और कहीं वायलेशन अभी ऐसी कोई, बीच में कुछ वायलेशन के प्रकरण आए थे, वो भूमि सरकार में निहित कर दी गई है और आगे भी कोई कानून तोड़ेगा तो उस पर कार्रवाई होगी.

सवाल- जब आपकी सरकार आई थी तो आपने नकल को लेकर एक बहुत स्ट्रांग कानून बनाया था कि नकल नहीं होनी चाहिए, सख्त सजा होनी चाहिए उसकी क्या स्थिति, क्या उसका जमीन पर कुछ लाभ मिला है कि छात्रों में नकल रुकी हो?

जवाब- नकल का कानून हम लेकर आए और वो नकल का कानून पूरे भारत का सबसे सख्त नकल कानून है. इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है, और इसमें हमने 100 से भी अधिक नकल माफियाओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजा है.

सवाल- तो पेपर लीक अब नहीं हो रहे हैं?

जवाब- बिल्कुल नहीं, पेपर लीक कोई एक भी नहीं हुआ है.उत्तराखंड के अंदर पेपर लीक का एक भी प्रकरण पिछले 4 सालों में नहीं आया है

सवाल- उत्तराखंड अलग बना, उसके लिए महिलाओं ने बहुत बड़ी उसमें भूमिका निभाई और महिलाएं एक तरह से कह सकते हैं कि उत्तराखंड की रीढ़ हैं उनके लिए आपने पिछले 5 साल में आपकी सरकार ने क्या किया है?

जवाब- महिलाएं हमेशा से हमारी प्राथमिकता में रही हैं. उत्तराखंड राज्य का निर्माण हो, उत्तराखंड की घर-परिवारों को चलाना हो, उसमें महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान होता है. उत्तराखंड के अंदर सरकारी नौकरियों में भी हमने 30% का आरक्षण महिलाओं के लिए सुनिश्चित किया है, जिससे कि महिलाएं जो हैं हमारी सरकारी नौकरियों में भी बड़ी भागीदारी उनकी हो जाए सहकारी समितियों में भी हमने आरक्षण 30% से अधिक किया है, 33% का आरक्षण लागू किया है तो महिलाएं हमारी प्राथमिकता है और राज्य की जो सामाजिक व्यवस्था है, उसको चलाने में बहुत बड़ा योगदान महिलाओं का है

सवाल- उत्तराखंड से भ्रष्टाचार को लेकर के खबरें आती हैं, तो उस पर आप क्या एक्शन कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार ना हो? माइनिंग की बात हो या रिक्रूटमेंट की बात हो, इसमें कहीं भी कोई इस तरह की करप्शन ना हो?

जवाब- भ्रष्टाचार पर 'नो टॉलरेंस' होगा, ये हमारा संकल्प है और इस संकल्प को आगे बढ़ाते हुए हमने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है. आज 250 से भी अधिक ऐसे मामलों में सीधे बड़ी कार्रवाइयां की हैं.

सवाल- सिटिंग आईएएस ऑफिसर को ही हटाने का रिकमेंडेशन दे दी थी?

जवाब- जो भी रिपोर्ट आई थी, रिपोर्ट हुई है, इस पर जांच हुई है और जांच के बाद जो भी चीजें सामने आईं उस पर कार्रवाई की गई है. माइनिंग एक बड़ी समस्या होती थी.उत्तराखंड में, हर सरकार के लिए चुनौती होती थी रेवेन्यू पूरे साल भर में ₹300-400 करोड़ होता था. हमारी इन शक्तियों के कारण से आज वो रेवेन्यू हमारा ₹1200 करोड़ को भी क्रॉस कर गया है यानी कि एक साल में ₹800-900 करोड़ रेवेन्यू में इजाफा हुआ है .

सवाल- आपने शुरुआत में कहा कि आपने धर्मांतरण को लेकर कानून बनाया है इसकी जरूरत क्या पड़ गई?

जवाब- देवत्व बचा रहना चाहिए, उसका मूल अस्तित्व नष्ट नहीं होना चाहिए, उसका नुकसान नहीं होना चाहिए देवभूमि की जो आस्था, श्रद्धा देवभूमि पर लोगों की है, वो नहीं होना चाहिए कहीं-कहीं पर कुछ इस प्रकार के प्रकरण आए कि जबरदस्ती धर्मांतरण हो रहा है, बहलाकर फुसलाकर, अनेक प्रकार.के प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है, तो देवभूमि की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हमने यह सख्त कानून बनाया है अब उत्तराखंड में बलपूर्वक या लालच देकर धर्मांतरण कराना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई
अपराध

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई
अपराध

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर
अपराध

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
अपराध

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका
अपराध

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
अपराध

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
अपराध

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
अपराध

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा

ताज़ा ख़बरें