महिला एयरफोर्स अधिकारियों को दिल्ली HC से राहत, परमानेंट कमीशन विवाद में डिस्चार्ज पर रोक
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सौजन्य से:- Aaj Tak News
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दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय वायुसेना की उन महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को बड़ी अंतरिम राहत दी है, जिन्हें परमानेंट कमीशन (PC) नहीं मिलने के बाद सेवा से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. कोर्ट ने कहा कि जब तक उनकी याचिका पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें एयर फोर्स की सेवा से रिलीज नहीं किया जाएगा.
महिला अधिकारियों का आरोप है कि एयर फोर्स ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में उन्हें सेवा से हटाने के आदेश जारी कर दिए.
कोर्ट ने साफ तौर से निर्देश देते हुए कहा कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन अधिकारियों को एयर फोर्स की सेवा से रिलीज नहीं किया जाएगा. अब इस मामले की मुख्य सुनवाई 10 जुलाई को रोस्टर बेंच के समक्ष होगी.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला...
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में उनके पक्ष में अंतरिम स्टे ऑर्डर पारित किया था, जिसके मुताबिक उन्हें सेवा से रिलीज नहीं किया जाना था. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि जब कोर्ट की छुट्टियां बंद थी, तब वायुसेना ने जल्दबाजी में रिलीज आदेश जारी कर दिए, जबकि मामला आर्मड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) में सुनवाई के लिए लंबित था. साल 2013 में कमीशन प्राप्त इन अधिकारियों को 2023 तक परमानेंट कमीशन के लिए विचार ही नहीं किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक अदालत में मामला लंबित है, तब तक सेवा से हटाने पर रोक बरकरार रहेगी.
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कानूनी लड़ाई और संघर्ष...
महिला अधिकारियों के मुताबिक, वायुसेना की 2019 की ह्यूमन रिसोर्स पॉलिसी में कुछ ऐसे प्रावधान थे, जो उनके करियर के लिए हानिकारक साबित हुए. कोर्ट के समक्ष यह बात भी सामने आई कि अधिकारी ने कानूनी राहत पाने के लिए AFT का रुख किया था, लेकिन वक्त पर सुनवाई नहीं हो पाई. अब दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एयर फोर्स के डिस्चार्ज ऑर्डर्स पर रोक लगा दी है. कोर्ट का यह निर्देश सुनिश्चित करता है कि परमानेंट कमीशन की मांग कर रही महिला अधिकारियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक सेवा से बाहर नहीं किया जाएगा.
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए इसे रोस्टर बेंच के पास भेज दिया है. अगली सुनवाई 10 जुलाई को अदालत की छुट्टियां खुलने के बाद निर्धारित की गई है. तब तक सभी संबंधित महिला अधिकारी वायुसेना की सेवा का हिस्सा बनी रहेंगी. यह फैसला उन महिला अधिकारियों के लिए एक बड़ी कानूनी जीत है, जो लंबे वक्त से परमानेंट कमीशन और अपने करियर की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रही हैं. कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला उन सभी सैन्य कर्मियों के लिए अहम है, जो अपनी सेवा संबंधी विवादों को लेकर अदालतों का दरवाजा खटखटा रहे हैं.
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