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इलाहाबाद HC ने रेलवे इंजीनियर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया, तथ्यों के बजाय दी थी कानूनी सलाह

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे के डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। अदालत ने उनके द्वारा दिए गए कानूनी सलाह पर व्यंग्य किया है, जो तथ्यात्मक जानकारी से अधिक थे।

26 जून 2026 को 02:24 pm बजे
इलाहाबाद HC ने रेलवे इंजीनियर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया, तथ्यों के बजाय दी थी कानूनी सलाह

सौजन्य से:- Jagran

पूर्वोत्तर रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर को इलाहाबाद HC ने किया तलब, तथ्यों के बजाय दी थी कानूनी जानकारी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे के डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, गोरखपुर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। अदालत ने तथ्यों के बजाय कानूनी व्य ...और पढ़ें

HighLights

- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेलवे इंजीनियर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया।

- इंजीनियर ने तथ्यों के बजाय कानूनी सलाह दी, कोर्ट नाराज।

- अदालत ने 29 जून 2026 को व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश दिया।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे के डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (निर्माण) गोरखपुर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश एसटीएस इंफ्राटेक लिमिटेड की याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया।

रेलवे की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर द्वारा भेजे गए लिखित निर्देश प्रस्तुत किए। अदालत ने पाया कि निर्देशों में मामले के तथ्यों की जानकारी देने की बजाय कानूनी व्याख्याएं और न्यायिक दृष्टांत हैं।

इंजीनियर ने यह बताने की कोशिश की कि मामले को मध्यस्थता के लिए क्यों नहीं भेजा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले क्या कहते हैं, इसकी जानकारी दी।

बताया कि व्यावसायिक अनुबंधों में याचिका क्यों नहीं सुनी जानी चाहिए। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। कहा, ‘डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को किसी वकील की जरूरत ही नहीं है। इंजीनियर के निर्देश तथ्यात्मक जानकारी कम और कानूनी सलाह ज्यादा लगते हैं, जो कि उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।’

कोर्ट ने डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को सोमवार 29 जून 2026 को दोपहर दो बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया।

कहा है कि उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके निर्देश कानूनी सलाह की तरह क्यों लिखे गए और मांगी गई तथ्यात्मक जानकारी क्यों नहीं हैं।

कोर्ट ने अंतरिम आदेश अगली तारीख तक जारी रखने का आदेश दिया। रजिस्ट्रार अनुपालन को निर्देश दिया कि वह आदेश को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गोरखपुर के माध्यम से इंजीनियर को तत्काल भिजवाएं।

यह भी पढ़ें- 'प्रेम संबंध बिगड़ने को अपराध बनाने की कोशिश चिंताजनक', इलाहाबाद HC की महत्वपूर्ण टिप्पणी; दुष्कर्म केस रद

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