भ्रामक विज्ञापन के खिलाफ उपभोक्ता संगठन की हाई कोर्ट में कार्रवाई
एक उपभोक्ता संगठन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें कथित भ्रामक विज्ञापन का आरोप लगाया गया है जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक गुणवत्ता, प्रभाव और लाभ के बारे में भ्रमित होने की आशंका है।

मुंबई में एक प्रमुख उपभोक्ता संगठन ने कथित भ्रामक विज्ञापन को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक कंपनी ने अपने उत्पाद के प्रचार में ऐसे दावे किए, जिनसे उपभोक्ताओं को वास्तविक गुणवत्ता, प्रभाव और लाभ के बारे में भ्रमित होने की आशंका है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि विज्ञापन में किए गए कुछ दावों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक या तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। मामले को लेकर संबंधित कंपनी से भी जवाब मांगा गया है।
सूत्र: Aaj Tak
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भ्रामक विज्ञापन Consumer Protection Law के तहत गंभीर विषय माना जाता है। यदि कोई विज्ञापन उपभोक्ताओं को गुमराह करता है या उत्पाद के बारे में गलत धारणा बनाता है, तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ नियामकीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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