होमअपराधसोनम रघुवंशी जमानत केस: सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी पीठ से विचार लेने पर विचार किया
अपराध

सोनम रघुवंशी जमानत केस: सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी पीठ से विचार लेने पर विचार किया

सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने को लेकर याचिका पर कहा कि वह इस कानूनी सवाल पर बड़ी पीठ से विचार कराने पर सोच सकता है कि क्या गिरफ्तारी मेमो में केवल टाइपिंग की गलती के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध मानकर जमानत दी जा सकती है।

9 जुलाई 2026 को 05:58 pm बजे
सोनम रघुवंशी जमानत केस: सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी पीठ से विचार लेने पर विचार किया

सौजन्य से:- Amar Ujala

Indore news: सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ को भेज सकती है सोनम रघुवंशी जमानत केस

मेघालय हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस कानूनी सवाल पर बड़ी पीठ से विचार कराने पर सोच सकता है कि क्या गिरफ्तारी मेमो में केवल टाइपिंग की गलती के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध मानकर जमानत दी जा सकती है।

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

विस्तार

सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस कानूनी प्रश्न को बड़ी संविधान पीठ (लार्जर बेंच) के पास भेजने पर विचार कर सकता है कि क्या गिरफ्तारी मेमो में किसी वैधानिक धारा का गलत उल्लेख, किसी गिरफ्तारी को अवैध ठहराने और आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार हो सकता है।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर की पीठ ने यह भी यह भी कहा कि इस मामले में इस बात की विस्तार से जांच करेगी कि क्या मेघालय हाईकोर्ट द्वारा केवल गिरफ्तारी मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर सोनम रघुवंशी को जमानत देना उचित था। गुरुवार को राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष यह सवाल उठाया कि क्या गिरफ्तारी मेमो में किसी गलत कानूनी धारा का उल्लेख, जो केवल एक टाइपिंग की गलती हो, गिरफ्तारी को अमान्य घोषित करने और जमानत देने का पर्याप्त आधार हो सकता है।

मेघालय हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रखी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार उपलब्ध कराने में विफल रही। अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या की सजा) की जगह गलती से धारा 403 का उल्लेख किया गया, जो इस संदर्भ में लागू ही नहीं होती। हाईकोर्ट ने इसे न्यायिक विवेक के पूर्ण अभाव का उदाहरण माना था और इसके बाद उसकी जमानत बरकरार रखी गई।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई
अपराध

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई
अपराध

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर
अपराध

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
अपराध

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका
अपराध

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
अपराध

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
अपराध

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
अपराध

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा

ताज़ा ख़बरें