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कानून का डर घट रहा, अपराधी खुलेआम गोली चलाकर भाग रहे!

हांसी में एक जिम के संचालक की हत्या के बाद सवाल उठ रहा है कि कानून का डर अपराधियों में क्यों घट रहा है? पुलिस की नाकामी और लापरवाही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल है।

13 जून 2026 को 09:04 am बजे
कानून का डर घट रहा, अपराधी खुलेआम गोली चलाकर भाग रहे!

सौजन्य से:- Jansatta

हरियाणा के हांसी में एक जिम संचालक की सरेआम गोली मारकर हत्या कर देने की घटना ने एक बार फिर इस बात को उजागर किया है कि अपराधियों को कानून का कोई खौफ नहीं है। जब अपराधी खुलेआम हथियार लेकर घूमते हों और मौका पाकर इस तरह की वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाएं, तो कानून व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इससे न केवल आमजन में असुरक्षा की भावना बढ़ती है, बल्कि सरकार के सुरक्षा एवं जांच तंत्र पर उनका भरोसा भी डगमगाने लगता है।

सवाल है कि आखिर अपराधियों के भीतर कानून का भय क्यों खत्म हो गया है? इसे सुरक्षा एजेंसियों की लापरवाही और नाकामी नहीं, तो और क्या कहा जाएगा कि हत्या जैसी संगीन वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी आसानी से फरार हो जाते हैं? सरकार की ओर से अक्सर यह दावा किया जाता है कि सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए समूची प्रणाली को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। इसके बावजूद अगर अपराध कम नहीं हो रहा, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

गौरतलब है कि हांसी में जिम संचालक की गुरुवार सुबह उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई, जब वह लोगों के एक समूह को खुले में व्यायाम करा रहे थे। मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने दस गोलियां चलाईं। यानी हमलावर यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि जिम संचालक किसी भी हाल में जिंदा न बचे। इस वारदात की सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई, लेकिन हमलावर फरार होने में कामयाब रहे।

इस घटना के कुछ घंटों बाद दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने एक जिम पर गोलीबारी की, जिसकी जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े एक समूह ने ली है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इन दोनों घटनाओं का आपस में कोई संबंध है। फिलहाल पुलिस इस बारे में जांच कर रही है।

मगर शासन-प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा कि सिर्फ कानून बना देने से सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त नहीं हो जाती। जब तक सुरक्षा एवं जांच तंत्र में हर स्तर पर सतर्कता, संवेदनशीलता और जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक कानून व्यवस्था में सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती।

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