जम्मू कश्मीर में लागू हुआ नया किरायेदारी कानून, मालिक-किरायेदार के लिए राहत
जम्मू कश्मीर में लागू हुए नए किरायेदारी कानून से मालिक-किरायेदार के बीच संबंध स्पष्ट और सुरक्षित बनेंगे। किराया प्राधिकरण विवाद सुलझाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करेगा।

सौजन्य से:- Jagran
जम्मू-कश्मीर में नया किरायेदारी कानून लागू, मालिक-किरायेदार दोनों को राहत, विवाद सुलझाने को मिलेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मकान मालिक-किरायेदार संबंधों को स्पष्ट और सुरक्षित बनाने के लिए जम्मू कश्मीर किरायेदारी नियम-2026 अधिसूचित किए हैं। ...और पढ़ें
HighLights
- किरायेदारी समझौतों का डिजिटल पंजीकरण अब अनिवार्य होगा।
- किराया प्राधिकरण विवादों का समाधान करेगा, डेटा सुरक्षित रखेगा।
- मकान मालिक-किरायेदार दोनों के हितों की होगी रक्षा।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। मकान मालिक और किरायेदार के बीच संबंध स्पष्ट, सुरक्षित और कानूनी रूप से व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को जम्मू कश्मीर किरायेदारी नियम-2026 अधिसूचित कर दिए हैं।
इन नियमों के लागू होने से केंद्र शासित प्रदेश में किरायेदारी व्यवस्था के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार हो गया है। उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर विधानसभा में बजट सत्र-2026 के दौरान ही जम्मू कश्मीर किरायेदारी अधिनियम को पारित किया गया है।
आवास एवं शहरी विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार,सरकार ने जम्मू कश्मीर किरायेदारी अधिनियम को लागू करने से पहले 15 अप्रैल 2026 को इन नियमों का मसौदा सार्वजनिक किया था, लेकिन निर्धारित 15 दिनों की अवधि के दौरान कोई सुझाव या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। इसलिए मसौदा नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
J&K किरायेदारी नियम-2026 से हित सुरक्षित
उन्होंने बताया कि नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक किरायेदारी समझौते की जानकारी उसके निष्पादन के दो महीने के भीतर किराया प्राधिकरण को भौतिक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से देना अनिवार्य होगा। किराया प्राधिकरण दोनों पक्षों को सात कार्य दिवसों के भीतर एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) आवंटित करने के साथ ही ई-रसीद जारी करेगा।
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि किराया प्राधिकरण अधिनियम में निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्थानीय अथवा आधिकारिक भाषाओं में एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करेगा, जिसके माध्यम से सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए जा सकेंगे। डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी किराया प्राधिकरण की जिम्मेदारी होगी।
नियमों के अनुसार, किरायेदारी से संबंधित सभी विवरण, जिनमें नवीनीकरण, अवधि विस्तार, परिशिष्ट, पूरक समझौते और अन्य आवेदन शामिल हैं, केवल संबंधित पक्षों और किराया प्राधिकरण द्वारा अधिकृत व्यक्तियों के लिए ही उपलब्ध होंगे। इन्हें आम जनता या किसी अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा नहीं किया जाएगा।
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विवाद सुलझाने को मिलेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म
किराया संशोधन या अन्य शुल्कों को लेकर मकान मालिक और किरायेदार के बीच उत्पन्न विवादों के निपटारे की प्रक्रिया भी नियमों में स्पष्ट की गई है। किराया प्राधिकरण दोनों पक्षों की सुनवाई करेगा और क्षेत्र में प्रचलित किराया दरों सहित अन्य संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संशोधित किराया या शुल्क तय करेगी। आवश्यकता पड़ने पर वह सरकार से मान्यता प्राप्त संपत्ति मूल्यांकनकर्ताओं की भी नियुक्ति कर सकेगा।
नियमों के अनुसार, यदि मकान मालिक किराया लेने से इनकार करता है, तो किरायेदार सीधे किराया प्राधिकरण के पास किराया जमा करा सकेगा। इसके अलावा, यदि मकान मालिक अग्रिम किराया या सुरक्षा जमा राशि वापस नहीं करता है, तो उसे जम्मू-कश्मीर बैंक की मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) के बराबर ब्याज का भुगतान करना होगा।
संबधित अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर किरायेदारी नियम-2026 का उद्देश्य किरायेदारी व्यवस्था को पारदर्शी, सुरक्षित और कानूनी रूप से मजबूत बनाना है। यदि इन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन और क्रियान्वयन होता है, तो इससे मकान मालिक और किरायेदार दोनों के हितों की रक्षा होगी, विवाद कम होंगे और किराये की व्यवस्था अधिक भरोसेमंद बनेगी।
संभावित प्रभाव
- किराये का बाजार अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनेगा।
- मकान मालिक और किरायेदार के बीच विश्वास बढ़ेगा।
- अदालतों पर किरायेदारी से जुड़े मामलों का बोझ कम हो सकता है।
- डिजिटल रिकॉर्ड बनने से भविष्य में विवादों के समाधान में आसानी होगी।
- किराये के मकानों में निवेश और उपलब्धता बढ़ने की संभावना है।
- संभावित चुनौतियाँ
- ग्रामीण या दूर-दराज़ क्षेत्रों में डिजिटल प्रणाली का उपयोग शुरू में कठिन हो सकता है।
- सभी किरायेदारी समझौतों का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए चुनौती हो सकता है।
- किराया प्राधिकरण पर मामलों की संख्या बढ़ने से शुरुआती चरण में कार्यभार बढ़ सकता है।
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