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'अदालतों का बार-बार हस्तक्षेप बिगाड़ रहा मध्यस्थता की गति', संसद में पेश रिपोर्ट में खुलासा - judicial intervention slows arbitration parliament report

'अदालतों का बार-बार हस्तक्षेप बिगाड़ रहा मध्यस्थता की गति', संसद में पेश रिपोर्ट में खुलासा संसद की एक समिति ने कहा है कि अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप मध्यस्थता प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करता है और इसमें अनावश्यक देरी…

18 अगस्त 2026 को 05:55 pm बजे
'अदालतों का बार-बार हस्तक्षेप बिगाड़ रहा मध्यस्थता की गति', संसद में पेश रिपोर्ट में खुलासा
 - judicial intervention slows arbitration parliament report

सौजन्य से:- Jagran

'अदालतों का बार-बार हस्तक्षेप बिगाड़ रहा मध्यस्थता की गति', संसद में पेश रिपोर्ट में खुलासा

संसद की एक समिति ने कहा है कि अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप मध्यस्थता प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करता है और इसमें अनावश्यक देरी करता है।

HighLights

- अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप मध्यस्थता प्रक्रिया की दक्षता घटा रहा है।

- अनावश्यक देरी से मध्यस्थता की स्वतंत्रता कमजोर पड़ सकती है।

- समिति ने वैश्विक पहचान बढ़ाने हेतु कई उपाय सुझाए हैं।

पीटीआई, नई दिल्ली। संसद की एक समिति ने कहा है कि अत्यधिक या असंगत न्यायिक हस्तक्षेप मध्यस्थता प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करता है। इस तरह के हस्तक्षेप अक्सर उस प्रक्रिया में देरी करते हैं, जिसका उद्देश्य अदालतों में चलने वाले मुकदमों के मुकाबले विवादों का जल्द समाधान करना है।

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब सरकार देश को एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र बनाने के लिए प्रयास कर रही है।

विधि और कार्मिक संबंधी विभाग की स्थायी समिति ने संसद में पिछले सप्ताह पेश संस्थागत वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली संबंधी नई रिपोर्ट में कहा, हालांकि निष्पक्षता और वैधानिकता सुनिश्चित करने के लिए अदालतों की कुछ हद तक निगरानी आवश्यक है, लेकिन बार-बार या टाले जा सकने वाले हस्तक्षेप से अनावश्यक देरी हो सकती है और मध्यस्थता प्रक्रिया की स्वतंत्रता भी कमजोर पड़ सकती है।

समिति ने देश के वैकल्पिक विवाद समाधान के समक्ष वैश्विक स्तर पर सीमित पहचान को भी एक चुनौती के रूप रेखांकित किया और उसने इस समस्या के समाधान के लिए मध्यस्थता की कार्यवाही में निरंतर और एकसमान गुणवत्ता सुनिश्चित करने समेत कई उपाय सुझाए हैं।

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