सुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी मामले में तुरंत सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अगर सामान्य प्रक्रिया से उचित कार्रवाई करने में विफलता मिलती है, तो मामला उठाया जा सकता है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

सौजन्य से:- ETV Bharat
पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर सामान्य प्रक्रिया से उचित कार्रवाई करने में विफलता मिलती है तो मामला उठाया जा सकता है.
Published : July 6, 2026 at 8:55 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक इन्फ्लुएंसर (Influencer) द्वारा पैगंबर मुहम्मद पर कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया.
वकील रजत कुमार ने जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष यह मामला रखा. पीठ ने AoR (Advocate-on-Record) अंसार अहमद चौधरी की याचिका को तुरंत लिस्ट करने से मना कर दिया. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि टिप्पणियों से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है. पीठ ने याचिकाकर्ता से पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने और सिस्टम पर भरोसा रखने को कहा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक इन्फ्लुएंसर ने जून में एक पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर मुहम्मद और उनके परिवार के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की थीं. टिप्पणियों के क्लिप्स सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुए. इस घटना के बाद इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कई FIR दर्ज की गईं.
पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, "क्या आपने मामला दर्ज किया है? पुलिस वहां है. हमारी व्यवस्था पर भरोसा रखें..." पीठ ने कहा कि अगर सामान्य प्रक्रिया से उचित कार्रवाई करने में विफलता मिलती है तो मामला उठाया जा सकता है.
पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट निगरानी करने के लिए है और यह इस बारे में भी आंखें खोलने वाला है कि निचले स्तर के अधिकारी काम कर रहे हैं या नहीं?
पीठ ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी बातों को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सामग्री के प्रकाशन, प्रसार और प्रसार को रोकने, विनियमित करने और रोकने के लिए उचित दिशानिर्देश या नियम बनाने और लागू करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया, जो जानबूझकर अपमानजनक, आक्रामक, या श्रद्धेय धार्मिक हस्तियों के प्रति अपमानजनक हैं, जिसमें पैगंबर मुहम्मद और भगवान श्री राम शामिल हैं.
याचिका में अधिकारियों को यह भी निर्देश देने की मांग की गई है कि वे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और समुदायों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जानबूझकर गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं.
यह भी पढ़ें-धर्म और अधर्म को धुंधला करने वाले AI के उदाहरणों के लिए जीरो टॉलरेंस: सुप्रीम कोर्ट
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