भरण-पोषण से बचने की कोशिश नाकाम: बोरीवली अदालत ने पत्नी को १४ हजार प्रति माह के भरण-पोषण का आदेश दिया
बोरीवली की न्यायिक अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामले में सुनवाई करते हुए पति को फटकार लगाई और पत्नी को मासिक ७ हजार रुपए भरण-पोषण और ७ हजार रुपए वैकल्पिक आवास किराए की राहत प्रदान की।

सौजन्य से:- हिंदी सामना
-पत्नी को १४ हजार रुपए मासिक देने का आदेश
सामना संवाददाता / मुंबई
पत्नी को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी से बचने के लिए अपनी आय कम बतानेवाले पति को बोरीवली की न्यायिक दंडाधिकारी अदालत ने करारा झटका दिया है। घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहे मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने पति को फटकार लगाई और पत्नी को प्रतिमाह ७ हजार रुपए अंतरिम भरण-पोषण तथा ७ हजार रुपए वैकल्पिक आवास किराए के रूप में देने का आदेश दिया। इस प्रकार महिला को कुल १४ हजार रुपए प्रतिमाह की राहत मंजूर की गई है।
जानकारी के अनुसार, महिला का विवाह २६ मई २०२२ को हुआ था। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने पैसों की मांग को लेकर उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न शुरू कर दिया। जून २०२२ में महिला को पति के किसी अन्य महिला के साथ कथित संबंधों की जानकारी मिली। इस संबंध में सवाल उठाने पर उसके साथ मारपीट की गई।
दहेज के लिए किया उत्पीड़न
महिला ने अदालत को बताया कि १६ जुलाई २०२३ को तीन लाख रुपए की मांग पूरी नहीं होने पर ससुराल पक्ष ने उसका गला दबाने और लोहे की रॉड से हमला करने का प्रयास किया। इसके बाद वह अपने मायके में रहने लगी। पीड़िता ने नारपोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई और बाद में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत बोरीवली अदालत में याचिका दाखिल की।
पति ने जताई असहमति
सुनवाई के दौरान पति ने स्वयं को टेंपो चालक बताते हुए अपनी मासिक आय मात्र ९ हजार रुपए होने का दावा किया। हालांकि, न्यायिक दंडाधिकारी वीएफ चौगुले ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुंबई जैसे महानगर में रहकर केवल ९ हजार रुपए मासिक आय होना अविश्वसनीय प्रतीत होता है।
पति का दावा किया अस्वीकार
अदालत ने पति के दावे को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि पत्नी को सम्मानपूर्वक जीवनयापन का अधिकार है और उसकी देखभाल करना पति की कानूनी जिम्मेदारी है। इसी आधार पर अदालत ने महिला के पक्ष में अंतरिम राहत का आदेश पारित किया।
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इसका मतलब क्या है
बोरीवली की न्यायिक अदालत का यह आदेश घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहे मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक प्रतिक्रिया है। यह आदेश पत्नी को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी से बचने के लिए अपनी आय कम बताने वाले पति की कोशिश को नाकाम करता है। अदालत ने पति के दावे को अस्वीकार करते हुए पत्नी को प्रतिमाह ७ हजार रुपए की भरण-पोषण और ७ हजार रुपए के वैकल्पिक आवास किराए की राहत प्रदान की है। यह आदेश महिला सशक्तिकरण के प्रति अदालत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और पति के दोगले और वास्तविक आय को छिपाने के प्रयासों की निंदा करता है। इससे भविष्य में पति द्वारा अपनी आय को छिपाने के प्रयासों की रोकथाम होगी और महिलाओं को अधिकारों की राशनी मिलेगी।
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