वीरता पुरस्कार विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है, जिसमें एक पूर्व पुलिस अधिकारी को 'राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार' देने का निर्देश दिया गया था। केंद्र को 29 जुलाई तक आदेश का पालन करने का समय दिया गया है।

सौजन्य से:- Hindustan
वीरता पदक मामले में केंद्र के रुख पर सुप्रीम कोर्ट नाराज
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की नाराजगी जताई है कि उसने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें एक पूर्व पुलिस अधिकारी को 'राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार' देने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने केंद्र को 29 जुलाई तक आदेश का पालन करने का समय दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश का पालन न करने पर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने एक पूर्व पुलिस अधिकारी को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार’ देने को कहा था। अधिकारी ने दो दशक से पहले एक ऑपरेशन के दौरान दो डकैतों को ढेर किया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अर्जी पर सुनवाई करते हुए केंद्र को 29 जुलाई तक का समय दिया कि वह पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान को पुरस्कार देने के हाईकोर्ट के आदेश का पालन करे।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 25 मार्च के आदेश के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की है, जिसमें हाईकोर्ट के निर्देश को सही ठहराया गया था। मेहता ने कहा कि हमने समीक्षा याचिका दायर की है। यह सैद्धांतिक आपत्ति है, न कि अधिकारी के खिलाफ। मेहता ने तर्क दिया कि अगर समीक्षा याचिका सफल होती है, तो पुरस्कार वापस लिया जा सकता है और यह मामला किसी व्यक्ति के बजाय सिद्धांत का ज्यादा है। मेहता ने तर्क दिया कि सम्मान दिए जाते हैं, न कि न्यायिक निर्देशों के जरिए उनकी मांग की जाती है। जस्टिस नाथ ने जवाब दिया कि कोर्ट को पता है कि ‘मैन्डमस’(अदालती आदेश) कहां जारी करना है और कहां नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने ऐसा निर्देश जरूर किसी मज़बूत वजह से ही दिया होगा। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि कृपया सरकार को बता दें कि कोर्ट इस बात से खुश नहीं था। कोर्ट ने मामले को 29 जुलाई को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और यह भी साफ कर दिया कि अब और समय नहीं दिया जाएगा।
इस खबर पर आपकी क्या राय है?
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
ताज़ा ख़बरें
- ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026: जयराम रमेश ने केंद्र की योजना का किया समर्थन
- मेटा को 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए
- दोषियों की अपीलों में देरी को माफ करने का मौका, न्यायपालिका ने दी दिशानिर्देश
- JPSC परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
- शासन को आरोप तय करने में लगे 10 साल, अदालत में पहुंचते ही निरस्त
- उत्तर प्रदेश सरकार ने मृत कर्मचारियों के पुत्रों को नौकरी देने का निर्देश दिया
- JPSC परीक्षा का सुप्रीम कोर्ट में विवाद: परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग
- बच्चों की शिक्षा पर भार : शिक्षक भर्ती के लंबित मुकदमों के लिए स्पेशल कोर्ट, संघ ने दी मांग

