सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, आनंद मोहन की रिहाई पर उठाए गए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने आनंद मोहन की समय से पहले रिहाई पर चिंता जताई और बिहार सरकार के फैसले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा। अदालत ने मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं की जांच करने के लिए सुनवाई की।

सौजन्य से:- ETV Bharat
आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, बिहार सरकार के 'फैसले' पर फैसला सुरक्षित
आनंद मोहन की समय से पहले रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और ड्यूटी पर अधिकारी की हत्या को लेकर गंभीर सवाल उठाए.
Published : July 17, 2026 at 6:07 PM IST
नई दिल्ली/पटना : पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय से पहले हुई रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जोरदार सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. यह मामला बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2023 में जेल नियमों में किए गए संशोधन और उसके आधार पर दी गई रिहाई से जुड़ा है.
सभी पक्षों की दलीलें सुनी गईं : जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने याचिकाकर्ता उमा कृष्णैया, बिहार सरकार, आनंद मोहन तथा राज्य सजा माफी बोर्ड की ओर से पेश अधिवक्ताओं की दलीलें सुनीं. सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं और राज्य सरकार के फैसले के आधार पर विस्तार से सवाल किए.
ड्यूटी पर अधिकारी की हत्या पर अदालत के तीखे सवाल : सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह जानना चाहा कि ड्यूटी निभा रहे एक लोकसेवक की हत्या को 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में क्यों नहीं माना गया. पीठ ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी व्याख्या से समाज में गलत संदेश जा सकता है और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अपराध करने वालों का मनोबल बढ़ सकता है.
'गलत संदेश' को लेकर अदालत की चिंता : अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि यदि ऐसे मामलों में राहत का संदेश जाता है तो इससे यह धारणा बन सकती है कि सरकारी अधिकारी की हत्या के बाद भी दोषियों को राहत मिल सकती है. पीठ ने संकेत दिया कि इस तरह की सोच कानून-व्यवस्था और लोकसेवकों की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक हो सकती है.
क्या है आनंद मोहन से जुड़ा मामला : इस मामले में मुजफ्फरपुर की ट्रायल कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2007 को आनंद मोहन को मृत्युदंड सुनाया था. बाद में पटना हाईकोर्ट ने 10 दिसंबर 2008 को इस सजा को बदलकर कठोर आजीवन कारावास कर दिया. वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा.
2023 में नियम बदले और मिली रिहाई : बिहार सरकार ने वर्ष 2023 में जेल नियमों में संशोधन किया, जिसके बाद आनंद मोहन को समयपूर्व रिहाई का लाभ मिला. करीब 16 वर्ष जेल में रहने के बाद उन्हें 27 अप्रैल 2023 को सहरसा मंडल कारा से रिहा किया गया. अब इसी निर्णय की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है.
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