3 साल की नर्सरी स्टूडेंट से रेप के आरोपी केयरटेकर को दी गई जमानत रद्द, ट्रायल कोर्ट का आदेश हाई कोर्ट ने नकारा
दिल्ली हाइट कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और बच्ची की मां की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि पीड़ित की उम्र महज तीन साल है और उसे वयस्क की तरह बातें करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने केयरटेकर को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जिसमें जमानत रद्द कर दी गई थी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
जस्टिस विनोद कुमार की वेकेशन बेंच ने दिल्ली पुलिस और बच्ची की मां की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस और शिकायतकर्ता की दलीलों में दम है। कोर्ट ने दोनों याचिकाएं मंजूर करते हुए आरोपी को दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजने का रास्ता साफ कर दिया।
स्कूल में तीन साल की बच्ची से रेप का मामला
- सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि यह POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत गंभीर यौन हमले का मामला है, जिसमें न्यूनतम 20 साल की सज़ा का प्रावधान है।
- उन्होंने दलील दी कि पीड़ित बच्ची ने आरोपी की पहचान की है और उसके खिलाफ गंभीर व स्पष्ट आरोप लगाए हैं।
- ऐसे मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा मुख्य आरोपी को जमानत देना ठीक नहीं था।
- हालांकि, आरोपी के वकील ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अभियोजन की कहानी के 'बुनियादी तथ्य' ही टिकाऊ नहीं है और आरोपी को झूठा फंसाया गया है।
केयरटेकर गिरफ्तार, टीचर पर भी कार्रवाई
मामला 1 मई को सामने आया था, जब बच्ची की मां ने जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, बच्ची 30 अप्रैल को स्कूल गई थी, जो उसके दाखिले का दूसरा दिन था। घर लौटने पर उसने दर्द की शिकायत की और मां को बताया कि स्कूल के एक सुनसान हिस्से में ले जाकर उसके साथ गलत काम किया गया। पुलिस ने बच्ची के बयान और पहचान के आधार पर केयरटेकर को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। हालांकि द्वारका की ट्रायल कोर्ट ने 7 मई को उसे जमानत दे दी थी। वहीं, घटना की जानकारी अधिकारियों से छिपाने के आरोप में स्कूल की एक टीचर को भी गिरफ्तार किया गया था।जनकपुरी स्कूल केस
- ट्रायल कोर्ट के जमानत आदेश पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, POCSO कोर्ट में पेश होने का दिया निर्देश
- कोर्ट ने दोनों याचिकाएं मंजूर करते हुए आरोपी को दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजने का रास्ता साफ कर दिया
3 साल की बच्ची से बड़ों जैसी गवाही की उम्मीद नहीं की जा सकती : HC
- 'तीन साल के बच्चे से किसी वयस्क की तरह समय और घटनाक्रम का सटीक ब्योरा देने की उम्मीद नहीं की जा सकती।'
- इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने जनकपुरी के एक स्कूल में तीन साल की नर्सरी स्टूडेंट से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपी केयरटेकर को दी गई नियमित जमानत रद्द कर दी।
- वेकेशन जज जस्टिस विनोद कुमार ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय मामले के कई 'बेहद अहम' पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
- कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की उम्र महज तीन साल है और यदि इतनी कम उम्र का बच्चा कुछ बातें बेतरतीब या अतार्किक ढंग से बताता है तो केवल इसी आधार पर उसकी गवाही को अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
- कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे बच्चे से किसी वयस्क की तरह घटनाओं का समय, क्रम और सटीकता के साथ ब्योरा देने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
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