हाईकोर्ट ने निजी वित्त कंपनियों को दिया तगड़ा झटका, कानूनी प्रक्रिया के बिना वाहन जब्त नहीं कर सकती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि निजी वित्त कंपनियां कानूनी प्रक्रिया के बिना वाहन जब्त नहीं कर सकतीं। कोर्ट ने बताया कि हायर-पर्चेज या बंधक समझौते के तहत वाहन की वसूली भी कानून की प्रक्रिया के अनुसार ही की जानी चाहिए।

सौजन्य से:- ETV Bharat
हाईकोर्ट की टिप्पणी- बिना कानूनी प्रक्रिया के वाहन जब्त नहीं कर सकतीं निजी वित्त कंपनियां
कोर्ट ने कहा, हायर-पर्चेज या बंधक समझौते के तहत वाहन की वसूली भी कानून की प्रक्रिया के अनुसार ही की जानी चाहिए.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 11, 2026 at 8:48 PM IST
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी वित्त कंपनियों द्वारा अपने एजेंटों के माध्यम से वाहनों की जबरन जब्ती किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि याची की बाइक को प्रतिवादी संख्या दो और तीन से जुड़े निजी व्यक्तियों ने कानून की उचित प्रक्रिया अपनाए बिना जब्त किया. कोर्ट ने इसे कानूनन स्वीकार्य नहीं माना.
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पड़िया और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने कौशांबी के रितिक शर्मा की याचिका पर दिया है. कोर्ट ने कहा कि मामले में पेश पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी के निर्देशों को देखने के बाद प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि निजी वित्त कंपनियां अपने एजेंटों के माध्यम से वाहनों को जब्त कर रही हैं और राज्य के अधिकारी भी ऐसी गतिविधियों के मूकदर्शक बने हुए हैं.
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सिटीकॉर्प मारुति फाइनेंस लिमिटेड बनाम एस विजयलक्ष्मी मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हायर-पर्चेज या बंधक समझौते के तहत वाहन की वसूली भी कानून की प्रक्रिया के अनुसार ही की जानी चाहिए. वाहन की वसूली के लिए बल प्रयोग नहीं किया जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि समझौते में वसूली का प्रावधान होने का अर्थ यह नहीं है कि वित्त कंपनी या उसके एजेंट कानून अपने हाथ में लेकर वाहन कब्जे में ले लें.
कोर्ट ने कौशांबी के पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उनके द्वारा अदालत के समक्ष इस प्रकार के निर्देश किन परिस्थितियों में प्रस्तुत किए गए. साथ ही, प्रतिवादी संख्या दो और तीन को अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होकर अपनी कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है.
अदालत ने पुलिस अधीक्षक कौशांबी को दोनों प्रतिवादियों की अगली तारीख पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को होगी.
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