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सुप्रीम कोर्ट ने ऋण वसूली प्रक्रिया में सुधार के लिए शुरू की नई पहल

सुप्रीम कोर्ट ने ऋण वसूली प्रक्रिया में सुधार के लिए जिला विधिक प्राधिकरण के तहत सुलह-समझौते की पहल शुरू की है। इसमें कन्नौज के एक मामले को शामिल किया गया है। न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने का मौका देने का निर्णय लिया है।

5 जुलाई 2026 को 03:23 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने ऋण वसूली प्रक्रिया में सुधार के लिए शुरू की नई पहल

सौजन्य से:- Live Hindustan

रिकवरी लोन मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने ऋण वसूली प्रक्रिया में सुधार के लिए जिला विधिक प्राधिकरण के तहत सुलह-समझौते की पहल शुरू की है। कन्नौज के इंडियन बैंक मामले में यह पहल की गई है, जिसमें डेयरी लोन की रिकवरी के लिए सुनवाई शुरू हुई है। न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने का मौका देने का निर्णय लिया है।

तिर्वा, संवाददाता। बैंकों के द्वारा लोन रिकवरी मामले को लेकर बैंक के द्वारा अपनाई जा रही ऋण वसूली प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुलह-समझौते के आधार पर अपनाने के लिए जिला विधिक प्राधिकरण के तहत मामला के निपटाने के लिए पहल शुरू कर दी है। जिसके तहत कन्नौज में भी इंडियन बैंक के मामले को सुनवाई के निर्देश दिए गए हैं। लोन रिकवरी मामले को सरल बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिला विधिक प्राधिकरण के तहत सुलह-समझौते के आधार पर ऋण वसूली प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए हैं। जिसमें इंडियन बैंक द्वारा एक डेयरी लोन को लेकर जिला विधिक प्राधिकरण के तहत सुलह-समझौते के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया गया।

बताया गया है कि इंडियन बैंक की शाखा तिर्वा द्वारा एक डेयरी लोन की रिकवरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। जिसमें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जिला विधिक प्राधिकरण के तहत बैंक अधिकारियों को तलब कर प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्त हरि प्रसाद, अपर जिला जज रजनीश मोहन वर्मा एवं सचिव अनुजा सिंह ने सुनवाई शुरू कर दी है। जिसके तहत 29 जून एवं 02 जुलाई को अस्थाई अदालत द्वारा जिला विधिक कार्यालय पर सुनवाई की गई है। जिसमें जिला विधिक प्राधिकरण के सदस्य अधिवक्ता अशोक कुमार राजपूत ने बताया कि अगली सुनवाई के लिए 06 जुलाई लगाई गई है। दोनो पक्षों को विधिक न्यायालय के कार्यालय पर सुलह-समझौते के आधार पर सुना जाएगा। उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की एक अनोखी पहल है। जिससे याची को अपनी बात कहने का एक मौका मिलता है। दोनों पक्षो को सुनने के बाद विधिक न्यायालय द्वारा निर्णय लिया जाएगा।

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