सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का किया समर्थन
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करते हुए जंतर-मंतर पर संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और राष्ट्रगान गाया. उन्होंने छात्रों के साथ हुई ज्यादतियों की निंदा की और उन्हें न्याय की मांग करने के लिए खड़े होने का समर्थन किया.

सौजन्य से:- ABP News
'डंडे मारे गए, करंट लगाया', छात्रों के प्रदर्शन को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का मिला समर्थन
Neet Paper Leak Protests: सुप्रीम कोर्ट की वकील ननिता शर्मा ने कहा कि छात्रों के साथ जिस तरह की ज्यादतियां हुई हैं, हम उनके साथ खड़े हैं. उन्होंने पूछा कि छात्रों के साथ नाइंसाफी क्यों की जा रही है?
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के समर्थन और पुलिस की कार्रवाई के विरोध में संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और राष्ट्रगान गाया. इस दौरान उन्होंने कोई नारेबाजी नहीं की. सुप्रीम कोर्ट की वकील महालक्ष्मी पावनी ने कहा, 'हम शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त कर रहे हैं. हम छात्रों पर पुलिस की कथित बर्बरता और हिंसा की निंदा करते हैं. छात्र इस देश का भविष्य हैं और वे केवल अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे. पुलिस को उनके साथ इस तरह की हिंसा नहीं करनी चाहिए थी. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाज के रक्षक ही कथित तौर पर हिंसक हमलावर बन गए और महिलाओं और छात्रों पर बल प्रयोग किया.'
छात्रों को डंडे मारे गए, करंट लगाया: सुप्रीम कोर्ट की वकील
सुप्रीम कोर्ट की वकील ननिता शर्मा ने कहा, 'हम सभी यहां छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए एकत्र हुए हैं. छात्रों के साथ जिस तरह की ज्यादतियां हुई हैं, हम उनके साथ खड़े हैं. बच्चे सिर्फ अन्याय और उस शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे थे. उन छात्रों पर डंडे मारे गए... लाठीचार्ज हुआ. इलेक्ट्रिक करंट लगाया गया. वह सब हमारे बच्चे हैं. वो देश के भविष्य हैं. उनके साथ नाइंसाफी क्यों की जा रही है. सरकार उनके साथ बातचीत करने के लिए तैयार क्यों नहीं हो रही है. बातचीत से सब हल हो सकता है. यह बहुत शर्मनाक है.'
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा, 'हम यहां इसलिए खड़े हैं कि सुप्रीम कोर्ट न्याय का मंदिर है. हम अपनी आवाज उन तक पहुंचाना चाहते हैं जो अभी तक सुन नहीं पाए हैं. एक वकील होने के नाते हमारा धर्म है कि हम हिंदुस्तान के नागरिकों तक न्याय पहुंचाएं, इसलिए हम यहां हैं.'
उन्होंने कहा कि हम यहां छात्रों और न्याय के पक्ष में खड़े होने आए हैं. हम छात्रों के लिए न्याय की मांग करने आए हैं. हम यहां अपने लिए आंदोलन करने नहीं आए हैं. यह हमारे लिए नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों का सवाल है. सुप्रीम कोर्ट के सामने खड़े होकर उनके लिए न्याय की मांग करना वकीलों का कर्तव्य है.'
छात्रों के साथ हुआ अन्याय: एडवोकेट अरविंद शुक्ला
एडवोकेट अरविंद शुक्ला ने कहा, 'जो भी अन्याय हुआ है, हम सब बार के मेंबर उसका विरोध कर रहे हैं और हमने यह इसलिए किया है ताकि देश में हर किसी को यह बताया जा सके कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के मेंबर उनके साथ खड़े हैं और सपोर्ट करते हैं. स्टूडेंट्स के साथ जो भी गैर-कानूनी क्रूरता हुई है, हम उसकी निंदा करते हैं और हम इन चीजों के लिए जरूरी सभी कानूनी कार्रवाई करेंगे और यह पक्का करेंगे कि न्याय हो, इसीलिए हमने इसे अपने संविधान की प्रस्तावना के साथ शुरू किया है.' सीनियर एडवोकेट डॉ. एस मुरलीधर ने कहा कि हम उन सभी छात्रों के साथ खड़े हैं जो अपने अधिकारों के लिए विरोध कर रहे हैं, और हम उन सभी के लिए न्याय चाहते हैं.
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