पप्पू यादव ने सरकार को घेरा, कहा - पेपर लीक कानून संशोधन विधेयक है व्यक्तिगत फायदे का
सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए सरकार की परीक्षा प्रणाली, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली तथा पेपर लीक की घटनाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की स्थिति और भविष्य पर चर्चा नहीं कर रही है।

सौजन्य से:- Hindustan
लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन विधेयक पर पप्पू यादव ने सरकार को घेरा
-फोटो : 29purn03-सांसद पप्पू यादव पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथा
पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक 2026 पर आयोजित चर्चा में भाग लेते हुए सरकार की परीक्षा प्रणाली, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली तथा पेपर लीक की घटनाओं पर गंभीर सवाल उठाए।
सिस्टम की कमजोरियों पर प्रश्न
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सबसे पहले ऑडिट और सूचना के अधिकार (आरटीआई) को मजबूत करना जरूरी है, लेकिन मौजूदा सरकार हर नए कानून में इन दोनों व्यवस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी किसी व्यवस्था की सफलता के लिए जवाबदेही और जिम्मेदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया था, लेकिन मौजूदा सरकार लगातार अवहेलना करती है। पप्पू यादव ने कहा कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच एनटीए ने लगभग ₹3,554 करोड़ की आय अर्जित की, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर कोई चर्चा नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए के शीर्ष पदों पर ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति की गई, जिन पर पहले भी गंभीर सवाल उठे थे। उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी को पहले मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग के दौरान उच्च न्यायालय ने दोषी ठहराया, उसे बाद में यूपीएससी का चेयरमैन और फिर एनटीए का चेयरमैन बना दिया गया। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर ऐसे अधिकारियों को बार-बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों सौंपी जाती हैं।
छात्रों की स्थिति
सांसद ने कहा कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी होने के बावजूद एनटीए में वर्ष 2026 तक केवल 24 पदाधिकारी कार्यरत हैं, जबकि यही संस्था हर वर्ष 6 करोड़ से 8 करोड़ विद्यार्थियों से आवेदन भरवाती है और लगभग 8 करोड़ 20 लाख परीक्षाओं का संचालन करती है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन सरकारी नौकरियां सीमित हैं। उन्होंने कहा कि जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं में लगभग 20 लाख विद्यार्थी शामिल होते हैं, जबकि अवसर बेहद कम हैं। पप्पू यादव ने कहा कि नीट परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों का सबसे बड़ा खामियाजा छात्रों ने भुगता। उन्होंने दावा किया कि पहली परीक्षा में जहां कई छात्रों को 490-500 अंक मिलने की उम्मीद थी, वहीं दूसरी परीक्षा में उनके अंक घटकर 290-296 तक पहुंच गए, जिससे हजारों छात्र मानसिक अवसाद में चले गए। उन्होंने कहा कि लगभग 26 बच्चों की शहादत और एक बड़े छात्र आंदोलन के बावजूद सरकार ने छात्रों की मानसिक स्थिति और भविष्य पर कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने कहा कि एक लाख से अधिक छात्र डिप्रेशन का शिकार हुए, लेकिन सरकार ने इस विषय पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
आर्थिक भ्रष्टाचार के आरोप
सांसद ने सरकार से पूछा कि आखिर 6 से 8 करोड़ छात्रों से आवेदन शुल्क क्यों लिया जाता है, इससे होने वाली आय का उपयोग किस प्रकार किया जाता है और इसमें किन-किन लोगों की हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस कानून में जांच की जिम्मेदारी सीबीआई और एसआईटी को सौंपने की बात कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि जांच एजेंसियों की जवाबदेही कौन तय करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय मुखिया जैसे मामलों में भी कार्रवाई प्रभावी नहीं रही और राज्य सरकारों के अधिकार भी सीमित कर दिए गए। पप्पू यादव ने कहा कि पेपर लीक केवल अपराध नहीं बल्कि एक बड़ा संगठित आर्थिक कारोबार बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार छोटे स्तर के आरोपियों के लिए 5 से 10 वर्ष की सजा का प्रावधान कर रही है, लेकिन एनटीए की जवाबदेही तय करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि केवल दंड बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार आवश्यक है। लोकसभा में अपने भाषण के दौरान पप्पू यादव ने भारत की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय मॉडल अपनाने का सुझाव भी दिया। पप्पू यादव ने कहा कि सरकार ऐसा कानून लेकर आई है जो माफिया और सरकार को बचाता है, लेकिन छात्रों की सुरक्षा, एनटीए के ऑडिट, आरटीआई और उसकी जवाबदेही पर कोई चर्चा नहीं करता। उन्होंने कहा कि जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा सकती।
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