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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बांग्लादेश भेजे गए कुछ बंगाली भाषी व्यक्तियों को वापस लाया गया

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बांग्लादेश भेजे गए कुछ बंगाली भाषी व्यक्तियों को वापस लाया गया हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी नागरिकता पर कोई भी फैसला नहीं सुना रही है. Published : August 19, 2026 at 6:5…

19 अगस्त 2026 को 01:56 pm बजे
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बांग्लादेश भेजे गए कुछ बंगाली भाषी व्यक्तियों को वापस लाया गया

सौजन्य से:- ETV Bharat

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बांग्लादेश भेजे गए कुछ बंगाली भाषी व्यक्तियों को वापस लाया गया

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी नागरिकता पर कोई भी फैसला नहीं सुना रही है.

Published : August 19, 2026 at 6:50 PM IST

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भेजे गए कुछ बंगाली भाषी व्यक्तियों को, जिनकी नागरिकता पर संदेह था, भारत वापस लाया गया है. इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ ने की.

पीठ ने इस घटनाक्रम पर ध्यान दिया और कुछ बंगाली भाषी व्यक्तियों को वापस लाने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिकाओं का निपटारा कर दिया.सुनवाई के दौरान, निर्वासित व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के हस्तक्षेप से तात्कालिक समस्या का समाधान हो गया.

हेगड़े ने कहा, “मैं उनके (सॉलिसिटर जनरल) हस्तक्षेप के लिए उनका आभारी हूं. मामला सुलझ गया है. वे सभी वापस आ गए हैं.”पीठ ने हेगड़े की बात दर्ज की और यह भी नोट किया कि उसे सूचित किया गया है कि “विशेष मामले के रूप में, प्रतिवादियों को वापस लाया गया है.”

पीठ ने कहा कि चूंकि व्यक्ति भारत लौट आए हैं, इसलिए कार्यवाही को लंबित रखने का कोई कारण नहीं है और याचिकाओं का निपटारा कर दिया. हालांकि, पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि उसने इस मामले में निहित कानूनी प्रश्न को खुला छोड़ दिया है.

इस वर्ष मई में केंद्र सरकार ने पीठ को सूचित किया कि उसने कुछ लोगों को, जिन्हें पहले बांग्लादेश निर्वासित किया गया था, भारत वापस लाने का निर्णय लिया है और फिर उनकी भारतीय नागरिकता के दावे का सत्यापन किया जाएगा. पिछले वर्ष दिसंबर में, सर्वोच्च न्यायालय ने खातून और उसके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश में धकेले जाने के महीनों बाद "मानवीय आधारों" पर भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी.

ये भी पढ़ें : 27 लोगों को विदेशी घोषित करने का फैसला पलटा! सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश को किया रद्द

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