उत्तर प्रदेश: धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पादरी और दो महिलाओं की गिरफ्तारी, ईसाई समुदाय में चिंता
महराजगंज जिले में एक पादरी और दो महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद ईसाई समुदाय में चिंता का माहौल है, चर्च से जुड़े लोगों ने उनके लिए प्रार्थना करने की अपील की है।

सौजन्य से:- Catholic Connect
- 09 July, 2026
महराजगंज, 9 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक पादरी और दो महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद ईसाई समुदाय में चिंता का माहौल है। चर्च से जुड़े लोगों ने सभी विश्वासियों को उनके लिए प्रार्थना करने की अपील की है।
उनका कहना है कि हाल के समय में ईसाई प्रार्थना सभाओं को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।
गिरफ्तार किए गए लोगों में पादरी सरोज कुमार, उनकी पत्नी सरोज देवी और पड़ोसी प्रियंका जो कुशीनगर जिले की रहने वाली हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद तीनों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया।
स्थानीय ईसाई समुदाय के लोगों के अनुसार, 5 जुलाई को पिपरदेउरवा गांव में होने वाली रविवार की आराधना सभा शुरू होने से पहले ही पादरी सरोज कुमार और उनके परिवार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनकी गिरफ्तारी के कारण उस दिन की प्रार्थना सभा नहीं हो सकी। समुदाय के लोगों ने देशभर के ईसाइयों से इस परिवार के लिए प्रार्थना करने की अपील की है।
चर्च के सदस्यों ने बताया कि पादरी सरोज कुमार बहुत ही साधारण और मेहनती व्यक्ति हैं। वे अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए ऑटो-रिक्शा चलाते हैं और साथ ही एक छोटे ईसाई समुदाय की सेवा भी करते हैं। उनका परिवार टिन की चादरों और कपड़े से बने एक छोटे से अस्थायी घर में रहते है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।
पुलिस का कहना है कि गांव में कथित अवैध धर्म परिवर्तन की शिकायत मिलने के बाद जांच की गई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की गई।
पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान तीन धार्मिक पुस्तकें, बाइबल की आठ प्रतियां, 145 पर्चे (पैम्फलेट) और लगभग 10,000 रुपये नकद बरामद किए गए, जिन्हें जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। अधिकारियों ने आरोपों के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है और मामले की जांच अभी जारी है।
इस घटना के बाद कई ईसाई संगठनों ने विभिन्न राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है।
कानून के समर्थकों का कहना है कि इसका उद्देश्य जबरन, धोखे से या लालच देकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है। वहीं, ईसाई संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई बार पर्याप्त सबूत के बिना भी पादरियों और प्रार्थना सभाओं के खिलाफ ऐसे कानूनों का इस्तेमाल किया जाता है।
मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और जांच जारी है। ईसाई नेताओं ने सभी विश्वासियों से पादरी सरोज कुमार, उनके परिवार और धार्मिक तनाव से प्रभावित सभी लोगों के लिए प्रार्थना करने की अपील की है। उन्होंने न्याय, शांति और संविधान द्वारा दिए गए धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा की भी मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही किया जाएगा।
साभार: मेट्रो वार्ता
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