काला कानून साबित होगा एमएमडीआर संशोधन : राधाकृष्ण
काला कानून साबित होगा एमएमडीआर संशोधन : राधाकृष्ण झारखंड को सालाना 14 हजार करोड़ का होगा नुकसान, राज्य के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों को गंभीर चुनौती रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर न…

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काला कानून साबित होगा एमएमडीआर संशोधन : राधाकृष्ण
झारखंड को सालाना 14 हजार करोड़ का होगा नुकसान, राज्य के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों को गंभीर चुनौती
रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार के खनिज एवं खनिज विकास एवं विनियमन (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2026 को राज्य के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए इसे “काला कानून” करार दिया है। उन्होंने रविवार को एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि नए कानून में जोड़ी गई धारा 9डी के कारण झारखंड जैसे खनिज-संपन्न राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर एवं उपकर लगाने की क्षमता सीमित हो जाएगी। इससे राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और राजस्व पर दीर्घकालिक प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। झारखंड में बना था मिनरल बियरिंग लैंड सेस एक्ट
झारखंड मिनरल बियरिंग लैंड सेस एक्ट, 2024
झारखंड सरकार ने वर्ष 2024 में झारखंड मिनरल बियरिंग लैंड सेस एक्ट, 2024 बनाया था। इस कानून का उद्देश्य खनिज-युक्त भूमि पर सेस लगाकर उससे प्राप्त राशि का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, कृषि, ग्रामीण आधारभूत संरचना, पेयजल एवं स्वच्छता सहित जनकल्याणकारी कार्यों में करना था। कानून 7 अक्तूबर 2024 के झारखंड गजट में प्रकाशित हुआ था। राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, झारखंड को वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस सेस से करीब 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद थी। उनका कहना है कि एमएमडीआर संशोधन कानून के कारण इस अनुमानित आय पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
पुरानी खनिज एवं कोयला संबंधी देनदारियाँ
राधाकृष्ण किशोर ने झारखंड की पुरानी खनिज एवं कोयला संबंधी देनदारियों का मुद्दा भी उठाया है। उनके मुताबिक, राज्य सरकार को कोयला कंपनियों से करीब 1,36,042 करोड़ रुपये की राशि वसूलनी थी और नए प्रावधानों से ऐसी लंबित देनदारियों की वसूली पर गंभीर असर पड़ सकता है। यह आंकड़ा नया नहीं है। वर्ष 2022 में तत्कालीन झारखंड सरकार ने भी केंद्र के समक्ष कोयला कंपनियों से करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का दावा उठाया था।
झारखंड पर सालाना आर्थिक दबाव
वित्त मंत्री ने केंद्र की अन्य नीतियों का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि जीएसटी युक्तिकरण और वीबी-ग्राम-जी योजना सहित विभिन्न कारणों से झारखंड पर पहले से ही अतिरिक्त आर्थिक दबाव है। उनके मुताबिक, अब एमएमडीआर संशोधन से संभावित करीब 14 हजार करोड़ रुपये के नुकसान को जोड़ने पर राज्य पर सालाना 22 से 25 हजार करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ सकता है।
झारखंड पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
झारखंड देश के प्रमुख खनिज-संपन्न राज्यों में शामिल है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, अभ्रक, यूरेनियम सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। खनन से मिलने वाला राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्री का कहना है कि खनिज संपदा से होने वाली आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ उसका सामाजिक, पर्यावरणीय और आधारभूत संरचना पर दबाव भी झारखंड को ही झेलना पड़ता है। खनन क्षेत्रों में सड़क एवं परिवहन ढांचे पर दबाव, विस्थापन, पर्यावरणीय क्षति, जल एवं वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तथा वन एवं स्थानीय सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था पर प्रभाव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त संसाधन खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में राज्य सरकार की दलील है कि खनिज संसाधनों से होने वाली आय में राज्यों की पर्याप्त हिस्सेदारी और कराधिकार बनाए रखना जरूरी है।
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