हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पंचायती राज विभाग को सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच के निर्देश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला जिले की पंचायत में सरकारी धन के दुरुपयोग और रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोपों से जुड़े एक मामले में विभाग को जांच के निर्देश दिए हैं. अदालत ने कहा कि विभाग विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के आधार पर शिकायत की जांच करे और कानूनी कार्रवाई करे. यह मामला ग्राम पंचायत जलाईल में निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
हिमाचल हाईकोर्ट ने पंचायती राज विभाग को जांच करने के दिए निर्देश, सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप का मामला
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा, कोर्ट की ओर से ऐसा कोई अंतरिम आदेश या स्टे नहीं दिया गया था, जिससे विभाग कार्रवाई करने से रुक जाता.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 14, 2026 at 7:15 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला जिले की पंचायत में सरकारी धन के दुरुपयोग और रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोपों से जुड़े एक मामले में विभाग को जांच के निर्देश दिए हैं. न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पंचायती राज विभाग को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. हिमाचल हाईकोर्ट में जिला शिमला की ग्राम पंचायत जलाईल की पूर्व प्रधान अंजना रोहाल की ओर से याचिका दायर की गई थी.
सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में हाईकोर्ट का निर्देश
याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने कहा कि विभाग विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के आधार पर शिकायत की जांच करे और जो भी कानूनी कार्रवाई बनती हो, उसे जल्द पूरा करे. याचिकाकर्ता वर्ष 2018 से 2023 तक ग्राम पंचायत जलाईल की प्रधान रही हैं. उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के एक जूनियर इंजीनियर और पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे. उनका आरोप था कि मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए अदालत दरवाजा खटखटाया पड़ा.
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के सामने आया कि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने शुरुआती जांच में इस मामले में सीधे तौर पर कोई विजिलेंस एंगल नहीं पाया और आगे की जांच के लिए मामला पंचायती राज विभाग को भेज दिया था. विभाग का कहना था कि हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के कारण उसने आगे कोई कार्रवाई नहीं की. इस पर अदालत ने स्पष्ट कहा कि कोर्ट की ओर से ऐसा कोई अंतरिम आदेश या स्टे नहीं दिया गया था, जिससे विभाग कार्रवाई करने से रुक जाता. इसलिए विभाग का यह रवैया सही नहीं था.
अदालत ने कहा कि, पंचायती राज विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाए और विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट का अध्ययन करे. अदालत ने निर्देश दिए कि विभाग कानून के अनुसार मामले में बिना देरी किए उचित कार्रवाई करे. अदालत ने ये भी स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक जांच में अगर विजिलेंस से जुड़ा कोई पहलू सामने आता है, तो नियमों के अनुसार मामला दोबारा विजिलेंस ब्यूरो को भी भेजा जा सकता है.
सरकारी धन के दुरुपयोग और रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े के आरोप
मामला ग्राम पंचायत जलाईल में भीमराव अंबेडकर भवन और हनुमान मंदिर के पास बनाए गए एक खेल मैदान के निर्माण से जुड़ा हुआ है. मामले में याचिकाकर्ता पूर्व प्रधान अंजना रोहाल ने आरोप लगाया है कि इन निर्माण कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुईं. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकारी धन के गलत इस्तेमाल के लिए रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जीवाड़ा किया गया. उन्होंने मांग की थी कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर कानूनी जांच कराई जाए. विजिलेंस ब्यूरो ने अपने स्तर पर जांच के बाद इसे प्रशासनिक मामला मानते हुए पंचायती राज विभाग को भेज दिया था. इसी निर्णय को चुनौती देते हुए पूर्व प्रधान हाईकोर्ट पहुंची. अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि विभाग शिकायत की जांच करे और कानून के मुताबिक आवश्यक कार्रवाई करे.
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