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क्या सलवार उतारना और छाती दबाना रेप नहीं है? जानें कानून में बलात्कार की परिभाषा

पटना हाईकोर्ट ने बलात्कार के खिलाफ एक केस में फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि सलवार उतारने की कोशिश करना और छाती दबाना रेप नहीं है. इस फैसले के साथ ही सोशल मीडिया पर कोर्ट की आलोचना शुरू हो गई है, और लोग इसे संवेदनहीन मान रहे है. चलिए जानें कि कानून की नजर में बलात्कार की परिभाषा क्या होती है और क्या है सहमति की परिभाषा.

16 जुलाई 2026 को 08:14 am बजे
क्या सलवार उतारना और छाती दबाना रेप नहीं है? जानें कानून में बलात्कार की परिभाषा

सौजन्य से:- ABP News

छाती दबाना और सलवार उतारना रेप नहीं! तो क्या है कानून में बलात्कार की परिभाषा? जिस पर ट्रोल हुआ पटना HC

पटना हाईकोर्ट ने बलात्कार को लेकर एक केस में फैसला सुनाया है, जिसमें कहा है कि सलवार उतारने की कोशिश करना और छाती दबाना रेप नहीं है. चलिए जानें कि आखिर रेप की परिभाषा क्या है.

पटना हाईकोर्ट की एक हालिया कानूनी टिप्पणी ने देश भर में एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे कानूनी बारीकियों और सामाजिक दृष्टिकोण को आमने-सामने खड़ा कर दिया है. बांका जिले के एक पुराने मामले पर अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी महिला की सलवार उतारने की कोशिश करना या उसकी छाती दबाना कानूनी रूप से बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता है. इस फैसले के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कोर्ट की कड़ी आलोचना शुरू हो गई है. आम लोग इसे संवेदनहीन मान रहे हैं, और पटना हाई कोर्ट को जमकर ट्रोल कर रहे हैं. चलिए जानें कि कानून की नजर में आखिर बलात्कार की परिभाषा क्या होती है.

आखिर पूरा मामला था क्या?

यह पूरा विवाद बिहार के बांका जिसे के अमरपुर में साल 2008 में हुई एक घटना से जुड़ा है. एक युवती अपने पिता के साथ स्टूडियो में फोटो खिंचाने के लिए गई थी, जहां स्टूडियो संचालक ने पिता को बाहर भेजकर दरवाजा बंद कर लिया. आरोपी ने अंदर युवती के साथ जबरदस्ती करते हुए उसकी सलवार उतारने की कोशिश की और उसकी छाती दबाई, लेकिन जब लड़की ने शोर मचाया तो वह भाग निकला. इस मामले में निचली अदालत से दोषी पाए गए शख्स की अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य या कृत्य स्पष्ट नहीं है, जिससे बलात्कार के प्रयास का अपराध सिद्ध हो सके और इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया.

ऐसे में सवाल यह है कि अगर किसी महिला की इजाजत के बिना उसकी छाती दबाना या फिर सलवार उतारना रेप की परिभाषा में नहीं आता है तो फिर आखिर बलात्कार की परिभाषा है क्या?

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कानून के तहत क्या है बलात्कार की परिभाषा?

इस पूरे विवाद के बीच यह समझना जरूरी है कि देश की अदालतें भावनाओं पर नहीं, बल्कि लिखित कानून की परिभाषा पर काम करती हैं. देश के कानून के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 के तहत बलात्कार तब माना जाता है, जब कोई पुरुष किसी महिला की इच्छा के बिना उसके शरीर के गुप्त अंगों (योनि या गुदा) में अपने लिंग का प्रवेश कराता है. इसके अलावा किसी वस्तु या उंगली को महिला के निजी अंगों में डालना या उसके निजी अंगों पर मुंह लगाना भी इसी दायरे में आता है.

कानून की नजर में क्या है सहमति?

भारतीय कानून में सहमति यानी कंसेंट को बेहद बारीकी से समझाया गया है, ताकि किसी के भी साथ नाइंसाफी न हो. कानून कहता है कि सहमति का मतलब महिला कि अपनी मर्जी से दी गई स्पष्ट हां है, जिस पर किसी भी प्रकार का डर, लालच या फिर दबाव न हो. अगर कोई महिला डर के मारे विरोध नहीं कर पाती है या फिर रोने-चिल्लाने की स्थिति में नहीं होती है, तो अदालत उसे उसकी रजामंदी बिल्कुल नहीं मानती है. इसके अलावा अगर 18 साल से कम उम्र की लड़की, नशे में धुत महिला या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की सहमति को कानून की नजर में पूरी तरह से अमान्य और शून्य माना जाता है.

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