महाराष्ट्र में लागू हुआ धर्मांतरण विरोधी कानून, 10 साल तक की सजा का प्रावधान
महाराष्ट्र देश का 12वां राज्य बन गया है जहां धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हुआ है, इस कानून के तहत जबरदस्ती धर्मांतरण पर रोक लगाई गई है और 7 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है, वंचित बहुजन आघाडी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि वे इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

सौजन्य से:- Navbharat Times
बजट सत्र में विधेयक हुआ था मंजूर
देवेंद्र फडणवीस सरकार ने विधानमंडल के बजट सत्र 2026-27 में इस विधेयक को मंजूरी दी थी। विपक्षी कांग्रेस, एनसीपी शरद पवार गुट और समाजवादी पार्टी ने इस विधेयक विरोध किया था, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने समर्थन किया था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि बिल का मकसद जबरदस्ती या धोखे से किए गए धर्मांतरण को रोकना है। इसका मकसद अपनी मर्जी से धर्मांतरण या दूसरे धर्म में शादी को टारगेट करना नहीं है। धर्मांतरण विरोधी कानून राज्य में लागू होने पर महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने कहा कि इस कानून से संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को कोई ठेस नहीं पहुंचती है और न ही किसी धर्म को विशेष रूप से टारगेट किया गया है। इस कानून से पीड़ितों को न्याय मिलेगा। वहीं वंचित बहुजन आघाडी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि यह कानून एक विशेष धर्म को टारगेट करता है इसलिए वह इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
कानून में 7-10 साल तक की सजा का प्रावधान
धर्मांतरण विरोधी कानून जबरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच, झूठी जानकारी या शादी का वादा करके धर्मांतरण पर रोक लगाता है। इस कानून का उल्लंघन करने पर सात साल की जेल और 5 लाख रुपये तक सजा का प्रावधान है। जबकि बार-बार अपराध करने वालों के लिए सजा बढ़ाकर 10 साल की जा सकती है और 7 लाख रुपये का दंड लगाया जा सकता है। कानून के मुताबिक धर्मांतरण से पहले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को 60 दिन का नोटिस देना जरूरी किया गया है। कानून, धर्म बदलने वाले के माता-पिता, भाई-बहन और दूसरे रिश्तेदारों को भी शिकायत दर्ज कराने का अधिकार देता है।
धर्मांतरण विरोधी कानून के लागू होने से जबरन, धोखे, प्रलोभन या विवाह के जरिए किए जाने वाले अवैध धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही पीड़ितों को न्याय मिलेगा।
12 वां राज्य बना महाराष्ट्र
धर्मांतरण विरोधी कानून लागू महाराष्ट्र देश का 12 वां राज्य बन गया है। जिन राज्यों में यह कानून लागू है उसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। इन राज्यों में बनाए गए कानूनों का मकसद किसी भी व्यक्ति को दबाव, धोखा, लालच या शादी के जरिए धर्म बदलने के लिए मजबूर न किया जाए।
'बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दूंगा'
वंचित बहुजन आघाडी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा और आस्था के अनुसार धर्म अपनाने, बदलने और उसका प्रचार करने का अधिकार देता है। नया कानून धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास करता है और इसका दुरुपयोग की आशंका है। कानून के कई प्रावधान संविधान के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए मैं जल्द ही मुंबई हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर करूंगा। यह कानून नागरिकों के मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इसे न्यायालय में रद्द कराने की मांग की जाएगी।
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