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प्रेम संबंधों को अपराध के रूप में पेश करना बेहद खतरनाक, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जताई चिंता

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रेम संबंधों को अपराध के तौर पर पेश किए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि झूठा वादा करना और वादा न निभाना दोनों अलग-अलग चीजें हैं और दोनों के लिए अलग-अलग सजा होनी चाहिए। हाई कोर्ट की टिप्पणी तब आई है जब एक निर्दोष को फंसाने के लिए रेप का आरोप लगाया जा रहा था।

26 जून 2026 को 05:24 pm बजे
प्रेम संबंधों को अपराध के रूप में पेश करना बेहद खतरनाक, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जताई चिंता

सौजन्य से:- Navbharat Times

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले की चर्चा हो रही है। हाई कोर्ट ने प्रेम संबंधों के मामलों को अपराध के तौर पर पेश किए जाने की प्रवृति को खतरनाक बताया है।

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रेम संबंधों को अपराध के तौर पर पेश किए जाने पर चिंता जाहिर की है। हाल के दिनों में प्रेम संबंधों के मामलों को बाद में रेप के तौर पर पेश किए जाने को लेकर हाई कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने इस प्रकार के एक मामले की सुनवाई के क्रम में कहा कि झूठा वादा कर किसी को फंसाना और प्रेम संबंधों के दौरान ईमानदार रहने के बाद बाद में वादा न निभा पाना दोनों अलग-अलग चीजें हैं। दोनों में बड़ा फर्क होता है। प्रेम संबंध के शुरू में धोखा देने की नीयत न हो और बाद में किसी कारण से शादी टूट जाए तो इसे रेप की श्रेणी में रखा जा जा सकता है। हाई कोर्ट के इस फैसले की चर्चा हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रेम संबंधों के बाद रेप का आरोप लगाए जाने के एक मामले की सुनवाई के क्रम में बड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि प्रेम संबंधों को अपराध का रंग देने की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है। हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक कुमार सिंह की कोर्ट ने यह फैसला दिया है। उन्होंने कानपुर के व्यक्ति के खिलाफ रेप के आरोप में दाखिल चार्जशीट को इस टिप्पणी के साथ रद्द कर दिया।

कोर्ट ने क्या कहा?

आरोपी के खिलाफ शादी के नाम पर धोखा देने और रेप जैसे आरोपों में केस दर्ज किया गया था। पुलिस की ओर से उदित के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई। इसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई के क्रम में कोर्ट ने कहा कि तीन सालों तक दोनों रिलेशनशिप में रहे। इस दौरान दोनों की सहमति से शारीरिक संबंध बने। इतने दिनों तक चली लव स्टोरी को केवल शादी नहीं होने के कारण रेप नहीं माना जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ शादी का झांसा देकर शरीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था। आरोप था कि 2021 से 2024 के बीच दोनों के बीच रिलेशनशिप था। दोनों एक साथ एक कोचिंग में पढ़ते थे। एसबीआई में नौकरी मिलने के बाद उसके पिता ने पीड़िता के साथ शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने दिसंबर 2024 में एफआईआर दर्ज कराई थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के क्रम में पाया कि उस समय पीड़िता की आयु 28 साल थी।

कोर्ट ने उसे वयस्क और समझदार महिला माना। उसने संबंधों को लेकर तीन साल तक कोई शिकायत नहीं की। गवाहों के बयान और फोटोज से पुष्टि हुई कि दोनों के संबंध सहमति से बने थे। मामले में गवाहों ने मारपीट और धमकी के आरोपों को गलत बताया। ऐसे में एफआईआर दर्ज कराए जाने का कारण टूटता रिश्ता माना गया। कोर्ट ने इस आधार पर पूरी क्रिमिनल प्रोसिडिंग को रद्द कर दिया।

लेखक के बारे मेंराहुल पराशरराहुल पराशर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। वे नवभारत टाइम्स की यूपी-उत्तराखंड टीम में काम करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 22 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। राहुल पराशर ने अक्टूबर 2021 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 4 वर्षों में यूपी विधानसभा चुनाव, यूपी निकाय चुनाव, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, यूपी में एसआईआर प्रक्रिया जैसे बड़े घटनाक्रम का विस्तृत कवरेज किया है। राजनीति गतिविधियों से लेकर प्रशासनिक हलचल और क्राइम की घटनाओं पर उनका फोकस रहता है।

विशेषज्ञता- राजनीतिक खबरों का विश्लेषण, क्राइम की घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट, प्रशासनिक हलचल को लेकर इनसाइड स्टोरी, सरकार के फैसलों का आम लोगों पर असर का विश्लेषण।

पत्रकारिता अनुभव: अखबार और डिजिटल मीडिया में 22 साल से कार्यरत

राहुल पराशर ने साल 2004 में प्रभात खबर, पटना से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में जूनियर रिपोर्टर से लेकर प्रधान संवाददाता के पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों को कवर किया। उन्होंने शिक्षा विभाग की लंबे समय तक रिपोर्टिंग की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है।

शिक्षा:

राहुल पराशर ने वर्ष 2004 में भारतीय विद्या भवन के पीके इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म का कोर्स किया है। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर से आने वाले राहुल पराशर ने नेतरहाट, झारखंड से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से वर्ष 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल की है।... और पढ़ें

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