सोमनाथ भारती की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया, 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव का मामला
सोमनाथ भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सतीश उपाध्याय ने लोगों को पोलिंग बूथ तक लाने के लिए अपने एजेंट तैनात किए थे और एक नकली मुकाबला खड़ा किया था।

सौजन्य से:- Navbharat Times
आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। इस चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी सतीश उपाध्याय ने पिछले साल फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में सोमनाथ भारती को 2,131 वोटों के अंतर से हराया था।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने AAP नेता सोमनाथ भारती की उस याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया है, जिसमें 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में मालवीय नगर निर्वाचन क्षेत्र से BJP के सतीश उपाध्याय के चुनाव को चुनौती दी गई है। उपाध्याय ने पिछले साल फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में सोमनाथ भारती को 2,131 वोटों के अंतर से हराया था।
पहले खारिज हो चुकी है याचिका
भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट के 17 जनवरी के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। उनकी याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने सुनवाई हुई। बेंच ने कहा कि वे याचिका पर सुनवाई की इजाजत देंगे और मामले पर सुनवाई करेंगे।
पोलिंग बूथ तक लाने एजेंट तैनात किए
हाई कोर्ट में दायर अपनी चुनावी याचिका मेंभारती ने उपाध्याय पर 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951' के तहत गलत तरीके अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उपाध्याय ने लोगों को कारों से पोलिंग बूथ तक लाने के लिए अपने एजेंट तैनात किए थे। भारती ने यह भी आरोप लगाया कि उस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार जितेंद्र कुमार कोचर का पूरा चुनावी अभियान खास तौर पर उनके ही खिलाफ चलाया गया था।
नकली मुकाबला खड़ा करने का आरोप
भारती ने आरोप लगाया था कि उपाध्याय ने जान-बूझकर और एक सोची-समझी रणनीति के तहत एक नकली मुकाबला खड़ा किया, जिसका मकसद सेक्युलर वोटों को भ्रमित और विभाजित करना और चुनाव में अनुचित लाभ हासिल करना था। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता (भारती) का कोचर को पक्षकार न बनाना कोई मामूली तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक ऐसी गंभीर कमी है जिसे सुधारा नहीं जा सकता; और ROPA (1951 का कानून) के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, यह मौजूदा चुनाव याचिका के स्वीकार्य होने की बुनियाद पर ही चोट करती है।
चुनाव याचिका खास कानूनी प्रक्रिया
हाई कोर्ट ने भारती की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि कोचर को प्रतिवादी के तौर पर शामिल न करने की वजह से चुनाव याचिका खारिज किए जाने लायक थी। कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका कोई आम मुकदमा नहीं, बल्कि एक खास कानूनी प्रक्रिया है, जिसके नतीजे सीधे जनता के जनादेश पर असर डालते हैं। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 1951 के कानून के प्रावधानों की व्याख्या सख्ती और सीमित दायरे में की जानी चाहिए।
लेखक के बारे मेंअक्षय श्रीवास्तवअक्षय श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मार्च 2025 में उन्होंने टाइम्स समूह का डिजिटल विंग नवभारत टाइम्स (NBT Digital) ज्वाइन किया। यहां अक्षय न्यूज टीम का हिस्सा हैं और राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ दिल्ली और अपराध से जुड़े समाचारों का संपादन और क्यूरेशन करते हैं। समय-समय पर वह फील्ड रिपोर्टिंग में भी उतरते हैं। अक्षय ग्राउंड पर जाकर खबरों के पीछे छिपी कहानी को निकालने में रुचि रखते हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के अनुभव में अक्षय ने रिपोर्टिंग के साथ-साथ डेस्क पर भी कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। अक्षय ने साल 2019 और 2024 की राजनीति के निर्णायक लोकसभा चुनाव भी कवर किए हैं।
करियर के दौरान अक्षय ने प्रिंट मीडिया में एक लंबी पारी खत्म कर साल 2018 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा। यहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता का शुरुआती काम सीखा। इसके बाद वह दैनिक भास्कर के डिजिटल सेक्शन में काम करने लगे। यहां उन्होंने जीके सेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। आज तक में कार्य के दौरान अक्षय ने कनमैलियों पर एक एक्सक्लूसिव स्टोरी की, जो चर्चा का विषय रही। नवभारत टाइम्स में वह कफ सिरप पीकर अपने बच्चे गंवाने वाले परिवारों तक पहुंचे और उनका दर्द जाना।
पत्रकारिता का अनुभव
अक्षय का पत्रकारिता करियर हिंदी अखबार दैनिक नव भारत भोपाल के साथ साल 2013 में बतौर ट्रेनी शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश से प्रकाशित राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर में 2014 से 2016 तक उप-संपादक के रूप में कार्य किया। 2016 से 2018 तक अक्षय ने दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक काम किया। साल 2018 में दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद जनवरी 2022 में AajTak डिजिटल के साथ जुड़े और मार्च 2015 तक होम पेज पर अपनी सेवाएं दीं।
अक्षय ने एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह कई प्रतियोगताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।... और पढ़ें
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