बहरत तिवारी एनकाउंटर केस: वकील को सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट भेजने की सलाह
बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद वकील नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि उन्हें अब पटना हाई कोर्ट जाने की सलाह दी गई है। इस मामले में उनकी पांच मुख्य मांगें थीं, जिनमें एक मांग थी कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में गठित समिति से कराई जाए।

सौजन्य से:- Navbharat Times
हाई कोर्ट जाइए... भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बोले याचिकाकर्ता के वकील
Edited by: आशुतोष कुमार पांडेय|IANS•
Bharat Bhushan Tiwari: भरत तिवारी एनकाउंटर की आंच सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई थी। एक वकील ने भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करने की मांग की थी। उन्होने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
हाइलाइट्स
- भरत तिवारी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया स्पष्ट निर्देश
- भरत तिवारी एनकाउंटर केस में वकील की मांग
- वकील ने की थी SC की निगरानी में जांच की मांग
वकील को पटना हाई कोर्ट जाने की सलाह
वकील नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट से मामले का स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। इसके बाद उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के कार्यालय से रिट याचिका दाखिल करने का निर्देश मिला, जिसके अनुसार उन्होंने याचिका दायर की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने से इनकार करते हुए इसे पटना हाई कोर्ट में ले जाने की सलाह दी।भरत तिवारी के परिजनों से लगातार संपर्क
मिश्रा के अनुसार कि भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने उनसे लगातार संपर्क बनाए रखा है और मामले में न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हमारी याचिका में पांच प्रमुख मांगें शामिल थीं। इनमें सबसे अहम मांग यह थी कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में गठित समिति से कराई जाए, क्योंकि राज्य स्तर पर निष्पक्ष जांच की उम्मीद कम दिखाई देती है।एनकाउंटर बिना अधिकारियों की सहमति के नहीं- वकील
उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी पुलिस एनकाउंटर की प्रक्रिया उच्च अधिकारियों की जानकारी और अनुमति के बिना संभव नहीं होती। ऐसे में संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मामले में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं और बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, जिससे प्रभावित पक्षों की आवाज उठाने वाला कोई नहीं बचा है।पटना हाई कोर्ट पहुंचेंगे याचिकाकर्ता
वकील ने यह भी कहा कि पिछले करीब 70 दिनों में बिहार में कई बड़े एनकाउंटर हुए हैं, जिनकी सूची भी वे अदालत के समक्ष रखना चाहते थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कानून किसी भी एजेंसी को फर्जी एनकाउंटर की अनुमति नहीं देता और ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। मिश्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पुलिस स्वयं किसी कार्रवाई को गलत या फर्जी मान रही है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।कन्वर्सेशन शुरू करें
Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
ताज़ा ख़बरें
- ममता बनर्जी पर हमला: अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय साप्ताहिक राउंड-अप: 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
- यूपी में खराब कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव ने की सरकार की आलोचना
- भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया: अखिलेश यादव
- स्मृति सभा में शामिल होने पर टिस के दो छात्रों की गिरफ्तारी, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
- मंत्री पटेल ने विपक्ष के आरोपों का दी reply, कहा नहीं ओबीसी आरक्षण घटाया
- क्या भारत में किसी राज्य में धर्म परिवर्तन के लिए सबसे सख्त कानून है?
- ट्रिब्यूनल ने यूपी कार दुर्घटना में मारे गए दंपति के बच्चों को 44 लाख का मुआवजा दिलाया

