बागपत जेल में बंदियों की संख्या घटी 450 से अधिक कैदी फिर कर गए घर
बागपत जिला कारागार में कुछ साल पहले बंदियों की संख्या 1100 से अधिक पहुंच गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बंदियों की संख्या 693 हो गई है, जिसमें से 570 से अधिक पुरुष हैं।

सौजन्य से:- Live Hindustan
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर, बागपत जेल में घट गई बंदियों की संख्या
बागपत जिला कारागार में कुछ साल पहले बंदियों की संख्या 1100 से अधिक पहुंच गई थी। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब बंदी संख्या 693 रह गई है। इसके लिए जमानत पर रिहाई और ओपन जेलों का विस्तार किया गया है। अब जेल की क्षमता से कम बंदियों के चलते बैरक खाली हैं।
बागपत। जिला कारागार में कुछ साल पहले हालात यह थे कि बंदियों की संख्या बैरकों से दो गुनी तक पहुंच चुकी थी। लगातार अपराधों के बढ़ने से जेल में आने वाले अपराधियों से जेल की क्षमता प्रभावित हो रही थी। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का असर यह हुआ कि बंदियो की संख्या कम हो गई। अब क्षमता से कम बंदियों के चलते काफी बैरकें खाली हैं। जिला कारागार बागपत के अंदर बंदियों की क्षमता 660 तक है, लेकिन कुछ समय पहले तक यहां बंदियों की संख्या 1100 से ऊपर गई थी। बंदियों संख्या कम करने की कवायद शुरू की तो कई सालों तक संख्या 900 बंदियों तक चलती रही। जेल के अंदर बैरकों में क्षमता से ज्यादा बंदियों के आने से व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाती थीं। सुप्रीम कोर्ट का कुछ साल पहले ऐतिहासिक फैसला आया और कहा कि देशभर की जेलों में बंदियों की संख्या को कम किया जाए。
जमानत पर रिहाई का सिलसिला
इसके लिए विचाराधीन कैदियों को जमानत पर रिहा करने का सिलसिला शुरू हुआ। समय से पूर्व रिहाई की नीति को लागू किया गया। ओपन जेलों का विस्तार किया यानी जेल से बाहर जाने वाले कैदी पर लगातार नजर रखी जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का लाभ बागपत के जिला कारागार को काफी मिला। वर्तमान में स्थिति यह है कि जेल के अंदर बंदियों की संख्या बैरकों की संख्या से कम हो चुकी है। वर्तमान में 693 बंदी जिला कारागार के अंदर निरुद्ध हैं, जिनमें से 570 से अधिक पुरुष और शेष महिलाएं बंद हैं। वर्तमान में देखा जाए तो जेल में बंदियों को रखने की क्षमता 900 से ऊपर है।
बंदियों की संख्या में कमी
कहना इनका
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बागपत जेल में बंदियों का संख्या लगातार कम हो रही है। एक वर्ष की बात करें तो 450 से अधिक बंदियों की संख्या कम हुई है। एक समय था जब जिला जेल में बंदियों की संख्या 1100 से अधिक पहुंच गई थी। बंदियों की संख्या घटने से जेल प्रशासन को काफी राहत मिली है।
-प्रशांत कुमार, जेलर जिला जेल बागपत
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लेखक के बारे में
Nazim Azadशॉर्ट बायो:
नाजिम आजाद पिछले 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान बागपत में ब्यूरो प्रभारी के पद पर काम कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
नाजिम आजाद भारतीय मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 27 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) बागपत जिले के ब्यूरो प्रभारी हैं। बागपत और शामली जनपद में 2008 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने विशेष खबरों के साथ अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है।
कॅरियर का सफर
नाजिम आजाद ने अपने कॅरियर की शुरुआत 1999 में राष्ट्रीय सहारा अखबार से की। इसके बाद शाह टाईम्स में उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2008 में हिन्दुस्तान के साथ जुड़े। स्टार न्यूज और आजतक जैसे नामचीन न्यूज चैनलों में भी अपनी सेवा दी। 2008 से वे हिन्दुस्तान में लगातार जिले के ब्यूरो प्रभारी के रुप में कार्य कर रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
एमए राजनीति शास्त्र, बीएड के साथ-साथ हिन्दी और पत्रकारिता में स्नातक होने से नाजिम को विज्ञान, हिन्दी और पत्रकारिता का विशेष संयोजन मिला। ब्यूरो प्रभारी रहते हुए एडिटिंग, न्यूज कंटेंट और पैकंजिंग के साथ-साथ टीम के नेतृत्व में पारंगत होने का मौका मिला।
उच्च शिक्षा और लक्ष्य
राजनीति और न्यूज कंटेंट आदि विषयों पर नाजिम की गहरी समझ है। राजनीति और सामाजिक मुददों से जुडी उन्होंने अनेक एक्सक्लूसिव स्टोरी ब्रेक की हैं। नाजिम का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता के साथ सटीक सूचना देने पर केंद्रित है। इसी को केंद्रित करते हुए उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।
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