सुप्रीम कोर्ट ने भगवंत मान के खिलाफ विरोध मार्च से जुड़े मामले पर सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने भगवंत मान के खिलाफ विरोध मार्च से जुड़े मामले को रद्द करने के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार नहीं होने का इकरार दिया है. यह मामला भगवंत मान द्वारा 2020 में बिजली के टैरिफ में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध मार्च निकालने से जुड़ा हुआ है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
'लोकतंत्र में हर कोई नारेबाजी करता है', सुप्रीम कोर्ट का भगवंत मान के खिलाफ विरोध मार्च से जुड़े मामले पर सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि, वह भगवंत मान के खिलाफ विरोध मार्च से जुड़े मामले पर सुनवाई के लिए तैयार नहीं है.
Published : July 16, 2026 at 7:25 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संकेत दिया कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ दंगे के केस को रद्द करने के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन की याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार नहीं है. मान ने 2020 में बिजली के टैरिफ में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध मार्च निकाला था.
यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने आया. बेंच चंडीगढ़ प्रशासन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने 2020 के एक विरोध से पैदा हुए दंगे के मामले को रद्द कर दिया था.
सुनवाई के दौरान, चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि प्रशासन को अलग-अलग आदेशों को चुनौती देने वाले 3 मामलों पर कुछ तकनीकी आपत्ति का सामना करना पड़ रहा है. राजू ने बेंच से इस मुद्दे पर बात करने के लिए उन्हें कुछ समय देने का अनुरोध किया. हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा कि बेंच याचिका पर सुनवाई करने के लिए इच्छुक नहीं है.
सीजेआई ने राजू से कहा , "लोकतंत्र में हर कोई नारेबाजी करता है. अब जब वह ( सीएम भगवंत मान) किसी जिम्मेदार पद पर हैं...हम समझते हैं कि वह अपनी जिम्मेदारी भी समझेंगे...मुझे लगता है कि अब यह ठीक है."
बेंच ने राजू से कहा कि अगर वह मामले के गुण-दोष के आधार पर बहस करने जा रहे हैं तो वह उन्हें सुनेगी, नहीं तो, वह हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने के लिए तैयार नहीं है. राजू ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने एक मिनी ट्रायल किया और पूरे मामले को रद्द कर दिया, जबकि मामले में गुण-दोष के आधार पर बहस करने पर जोर दिया.
प्रस्तुतीकरण सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को टाल दिया. हाई कोर्ट ने माना कि आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ पहली नजर में कोई मामला नहीं बनता है और आईपीसी के तहत कथित अपराध नहीं बनते हैं.
ये भी पढ़ें: 'हम बुलडोजर न्याय के खिलाफ फैसले पर कायम', अवमानना याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
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