पेपर लीक को लेकर मोदी सरकार ने दिलाया न्याय, कड़ी सजा का प्रावधान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पब्लिक एग्जामिनेशन एमेंडमेंट बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे पेपर लीक और गलत तरीकों के इस्तेमाल करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी। इसके तहत रोजाना सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा सकता है और आरोपियों को कम से कम पांच साल तक की जेल हो सकती है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
एंटी पेपर लीक बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी, कानून में जल्द से जल्द और कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान - लोकसभा और राज्यसभा
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Published : August 1, 2026 at 10:42 PM IST
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पब्लिक एग्जामिनेशन एमेंडमेंट बिल को 2026 को मंजूरी दे दी है. सरकार की ओर से जारी एक गजट नोटिफिकेशन में कानून मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी. इससे पहले ये बिल लोकसभा और राज्यसभा में पारित हुआ. बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही, ये कानून बन गया है. इसमें पब्लिक एग्जामिनेशन में पेपर लीक के मामलों में आरोपियों के जल्द से जल्द और कड़ी से कड़ा सजा दिलाने का प्रावधान है. इस बिल के तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें किसी भी सत्र अदालत को स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में बदल सकती हैं, जो मामले की सुनवाई रोजाना करेगा. उसे चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरी करनी होगी. पेपर लीक या गलत तरीकों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम पांच साल और अधिक से अधिक 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान है. वहीं, संगठित अपराध के लिए, बिल में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पब्लिक एग्जामिनेशन एमेंडमेंट बिल को 2026 को मंजूरी दे दी है. सरकार की ओर से जारी एक गजट नोटिफिकेशन में कानून मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी. इससे पहले ये बिल लोकसभा और राज्यसभा में पारित हुआ. बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही, ये कानून बन गया है. इसमें पब्लिक एग्जामिनेशन में पेपर लीक के मामलों में आरोपियों के जल्द से जल्द और कड़ी से कड़ा सजा दिलाने का प्रावधान है. इस बिल के तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें किसी भी सत्र अदालत को स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट में बदल सकती हैं, जो मामले की सुनवाई रोजाना करेगा. उसे चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरी करनी होगी. पेपर लीक या गलत तरीकों का इस्तेमाल करने वालों को कम से कम पांच साल और अधिक से अधिक 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान है. वहीं, संगठित अपराध के लिए, बिल में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
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