अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर दी मिश्रित प्रतिक्रिया, जिनपिंग पर कसा तंज
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के दो अहम फैसलों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के महिलाओं के खेलों में भाग लेने पर रोक लगाने वाले राज्यों के कानून को बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया, वहीं जन्मसिद्ध नागरिकता को बरकरार रखने वाले फैसले की आलोचना की।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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ट्रंप कभी खुश, कभी दुखी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर दी प्रतिक्रिया, जिनपिंग पर कसा तंज
Wed, 01 Jul 2026 05:06 AM IST
Pavan
एएनआई, वॉशिंगटन
एएनआई, वॉशिंगटन
Published by: Pavan
Updated Wed, 01 Jul 2026 05:06 AM IST
सार
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खेलों में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों पर रोक लगाने वाले राज्यों के कानूनों को बरकरार रखा, जिसका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वागत किया। वहीं कोर्ट ने अमेरिका में जन्मे बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता देने के संवैधानिक अधिकार को भी कायम रखा, जिस पर ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी।
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के दो अहम फैसलों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। एक ओर उन्होंने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के महिलाओं के खेलों में भाग लेने पर रोक लगाने वाले राज्यों के कानून को बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया, वहीं जन्मसिद्ध नागरिकता को बरकरार रखने वाले फैसले की आलोचना की।
ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों पर फैसले को बताया 'बड़ी जीत'
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इडाहो और वेस्ट वर्जीनिया के उन कानूनों को सही ठहराया है, जिनके तहत ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिलाओं और लड़कियों की खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोका जा सकता है। अदालत ने कहा कि शिक्षा में लैंगिक भेदभाव पर रोक लगाने वाला संघीय कानून टाइटल-9 स्कूलों को जैविक लिंग के आधार पर अलग-अलग खेल टीमें बनाने की अनुमति देता है। इस फैसले के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'यह बहुत बड़ी जीत है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खेलों में पुरुषों के खेलने के खिलाफ फैसला दिया है'। उन्होंने इसे एक 'बेतुकी स्थिति का अंत' बताया।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बहुमत की ओर से फैसला लिखते हुए न्यायाधीश ब्रेट कैवनॉ ने कहा कि संविधान और टाइटल-9 पूरे अमेरिका में महिलाओं और लड़कियों के खेलों की मौजूदा व्यवस्था बदलने की मांग नहीं करते। हालांकि, अदालत की उदारवादी न्यायाधीश सोनिया सोटोमेयर ने इस फैसले से असहमति जताई। उनका कहना था कि राज्यों को हर खेल और हर श्रेणी के लिए अलग-अलग आधार पर यह साबित करना चाहिए था कि ऐसे प्रतिबंध जरूरी क्यों हैं। इस फैसले का असर अमेरिका के स्कूल स्तर के खेलों पर सबसे अधिक पड़ने की संभावना है। अमेरिका के दो दर्जन से अधिक राज्यों में पहले ही ऐसे कानून लागू किए जा चुके हैं।
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जन्मसिद्ध नागरिकता पर फैसले से ट्रंप नाराज
दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया, जिसके जरिए वे अवैध प्रवासियों और अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के यहां जन्मे बच्चों की स्वत: अमेरिकी नागरिकता समाप्त करना चाहते थे। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में अदालत ने कहा कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार मिलता है, चाहे उनके माता-पिता की आव्रजन स्थिति कुछ भी हो। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि 14वें संशोधन का उद्देश्य अमेरिका में जन्मे हर व्यक्ति को नागरिकता का अधिकार देना था और अदालत आज भी उसी संवैधानिक वादे को निभा रही है।
ट्रंप ने चीन का जिक्र कर साधा निशाना
इस फैसले के बाद ट्रंप ने व्यंग्यात्मक अंदाज में शी जिनपिंग को बधाई देते हुए लिखा, 'मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन को जन्मसिद्ध नागरिकता पर मिली इस बड़ी जीत के लिए बधाई देना चाहता हूं'। ट्रंप का इशारा उन विदेशी नागरिकों की ओर था, जो अमेरिका में बच्चे के जन्म के जरिए नागरिकता हासिल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने पहले भी तथाकथित 'बर्थ टूरिज्म' को रोकने की बात कही थी। यह फैसला ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अवैध आव्रजन और जन्मसिद्ध नागरिकता उनके चुनावी अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं।
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ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों पर फैसले को बताया 'बड़ी जीत'
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इडाहो और वेस्ट वर्जीनिया के उन कानूनों को सही ठहराया है, जिनके तहत ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिलाओं और लड़कियों की खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोका जा सकता है। अदालत ने कहा कि शिक्षा में लैंगिक भेदभाव पर रोक लगाने वाला संघीय कानून टाइटल-9 स्कूलों को जैविक लिंग के आधार पर अलग-अलग खेल टीमें बनाने की अनुमति देता है। इस फैसले के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'यह बहुत बड़ी जीत है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खेलों में पुरुषों के खेलने के खिलाफ फैसला दिया है'। उन्होंने इसे एक 'बेतुकी स्थिति का अंत' बताया।
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बहुमत की ओर से फैसला लिखते हुए न्यायाधीश ब्रेट कैवनॉ ने कहा कि संविधान और टाइटल-9 पूरे अमेरिका में महिलाओं और लड़कियों के खेलों की मौजूदा व्यवस्था बदलने की मांग नहीं करते। हालांकि, अदालत की उदारवादी न्यायाधीश सोनिया सोटोमेयर ने इस फैसले से असहमति जताई। उनका कहना था कि राज्यों को हर खेल और हर श्रेणी के लिए अलग-अलग आधार पर यह साबित करना चाहिए था कि ऐसे प्रतिबंध जरूरी क्यों हैं। इस फैसले का असर अमेरिका के स्कूल स्तर के खेलों पर सबसे अधिक पड़ने की संभावना है। अमेरिका के दो दर्जन से अधिक राज्यों में पहले ही ऐसे कानून लागू किए जा चुके हैं।
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जन्मसिद्ध नागरिकता पर फैसले से ट्रंप नाराज
दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया, जिसके जरिए वे अवैध प्रवासियों और अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के यहां जन्मे बच्चों की स्वत: अमेरिकी नागरिकता समाप्त करना चाहते थे। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में अदालत ने कहा कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार मिलता है, चाहे उनके माता-पिता की आव्रजन स्थिति कुछ भी हो। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि 14वें संशोधन का उद्देश्य अमेरिका में जन्मे हर व्यक्ति को नागरिकता का अधिकार देना था और अदालत आज भी उसी संवैधानिक वादे को निभा रही है।
ट्रंप ने चीन का जिक्र कर साधा निशाना
इस फैसले के बाद ट्रंप ने व्यंग्यात्मक अंदाज में शी जिनपिंग को बधाई देते हुए लिखा, 'मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन को जन्मसिद्ध नागरिकता पर मिली इस बड़ी जीत के लिए बधाई देना चाहता हूं'। ट्रंप का इशारा उन विदेशी नागरिकों की ओर था, जो अमेरिका में बच्चे के जन्म के जरिए नागरिकता हासिल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने पहले भी तथाकथित 'बर्थ टूरिज्म' को रोकने की बात कही थी। यह फैसला ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अवैध आव्रजन और जन्मसिद्ध नागरिकता उनके चुनावी अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं।
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