इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कानूनी प्रखरार के साथ ही मानना ही भारतीय सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति है'!
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस्तेमाल किया कि बच्चों के साथ यौन संबंध को अपराध मानते हैं जैसे पीसीएमए और पॉक्सो कानून, इन कानून से ऊपर नहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ

सौजन्य से:- Lokmat News Hindi
पीसीएमए और पॉक्सो कानून से ऊपर नहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ?, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा- ये कानून बच्चों के साथ यौन संबंध को अपराध मानते हैं
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 9, 2026 05:15 IST2026-07-09T05:14:16+5:302026-07-09T05:15:07+5:30
अदालत ने एक जुलाई को याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्राथमिकी को रद्दे करने करने का कोई उचित आधार नहीं है।
प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि विवाह की आयु के रूप में किशोरावस्था की शुरुआत को मान्यता देने वाला मुस्लिम पर्सनल लॉ, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम जैसे कानूनों को निष्प्रभावी नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि ये कानून बच्चों के साथ यौन संबंध को अपराध मानते हैं।
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि धर्म की परवाह किए बिना देश के प्रत्येक नागरिक के लिए विवाह की न्यूनतम आयु वही होगी, जो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम में निर्धारित की गई है। खंडपीठ ने ये टिप्पणियां पुलिस और ‘चाइल्डलाइन’ की बचाव टीम पर कथित हमला करने तथा उनके काम में बाधा डालने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध करने वाली रुबी और 18 अन्य लोगों की याचिका को खारिज करते हुए कीं। बचाव दल ने बुलंदशहर जिले में 16 वर्षीय मुस्लिम लड़की का प्रस्तावित विवाह रुकवाने के लिए हस्तक्षेप किया था,
जिसके बाद उस समय हमला किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शरीया कानून के तहत लड़की के किशोरावस्था की दहलीज में कदम (आमतौर पर 15 वर्ष की आयु) रखने के बाद ही उसका विवाह किया जा सकता है। उन्होंने दलील दी कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (पीसीएमए) के प्रावधान विवाह से संबंधित उनके व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लॉ) को प्रभावित नहीं करते।
अदालत ने हालांकि इस दलील को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने कहा कि कोई भी व्यक्तिगत कानून, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) के तहत बाल विवाह पर लगाए गए प्रतिबंध या पॉक्सो अधिनियम के वैधानिक प्रभावों को निष्प्रभावी नहीं कर सकता।
खंडपीठ ने कहा कि अगर 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के विवाह की अनुमति दी जाती है, तो विवाह और यौन संबंधों के परस्पर जुड़े होने के कारण यह स्थिति पॉक्सो अधिनियम के उल्लंघन को वैधता प्रदान करने जैसी होगी। अदालत ने बचाव दल के साथ कथित तौर पर अभद्रता, धमकी और हमला किए जाने तथा टीम के सदस्यों को अपनी जान बचाने के लिए मजबूर होने संबंधी विवरण वाली प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा, “पीड़िता को बचाव दल की देखरेख और संरक्षण से जबरन ले जाया गया था, जिसके बाद अंततः उसे फिर से बचाया गया।
प्रथम दृष्टया यह सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने का मामला बनता है। प्राथमिकी में जिन अन्य अपराधों का उल्लेख है, उनकी भी गहन जांच आवश्यक है।” अदालत ने एक जुलाई को याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्राथमिकी को रद्दे करने करने का कोई उचित आधार नहीं है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
ताज़ा ख़बरें
- ममता बनर्जी पर हमला: अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय साप्ताहिक राउंड-अप: 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
- यूपी में खराब कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव ने की सरकार की आलोचना
- भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया: अखिलेश यादव
- स्मृति सभा में शामिल होने पर टिस के दो छात्रों की गिरफ्तारी, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
- मंत्री पटेल ने विपक्ष के आरोपों का दी reply, कहा नहीं ओबीसी आरक्षण घटाया
- क्या भारत में किसी राज्य में धर्म परिवर्तन के लिए सबसे सख्त कानून है?
- ट्रिब्यूनल ने यूपी कार दुर्घटना में मारे गए दंपति के बच्चों को 44 लाख का मुआवजा दिलाया

