सुप्रीम कोर्ट करेगा तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से जुड़े विवाद में तमिलनाडु सरकार की अपील पर विचार करने का फैसला किया है। मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने से कोई राहत नहीं मिल पाई है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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दीपम विवाद: सुप्रीम कोर्ट करेगा तमिलना़डु सरकार की याचिका पर सुनवाई, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार
Mon, 03 Aug 2026 02:44 PM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:44 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से जुड़े विवाद में तमिलनाडु सरकार की अपील पर विचार करने का फैसला किया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में मूल पक्षकारों से जवाब मांगा, लेकिन फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के अमल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिसमें राज्य के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्ज्वलित करने की अनुमति देने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मूल याचिकाकर्ता रमा रविकुमार और अन्य को नोटिस जारी किया। हालांकि, अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका को पहले से लंबित मामले के साथ जोड़ते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के 6 जनवरी के आदेश को चुनौती दी है। मदुरै पीठ ने 1 दिसंबर, 2025 को एकल पीठ द्वारा दिए गए उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें त्योहार के दिन परंपरागत रूप से दीप प्रज्ज्वलित करने का निर्देश दिया गया था।
क्या है कार्तिगई दीपम विवाद?
तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्ज्वलित करने से जुड़ा 'दीपम विवाद' तमिलनाडु के मदुरै स्थित प्रसिद्ध तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर धार्मिक परंपराओं और पूजा-अधिकारों को लेकर उत्पन्न विवाद है। यह पहाड़ी हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों के लिए आस्था का केंद्र मानी जाती है। पहाड़ी पर स्थित भगवान मुरुगन का प्राचीन मंदिर हिंदुओं के छह प्रमुख 'अरुपडई वीडु' में शामिल है, जबकि पहाड़ी पर ही एक सूफी दरगाह भी मौजूद है, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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क्यों भड़का विवाद?
विवाद तब गहराया जब कुछ हिंदू संगठनों ने पहाड़ी की चोटी पर पारंपरिक धार्मिक रीति के तहत दीप प्रज्ज्वलित करने की अनुमति मांगी। उनका कहना था कि यह वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। दूसरी ओर, कुछ पक्षों ने इस पर आपत्ति जताते हुए आशंका व्यक्त की कि इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। मामला अदालत पहुंचा और मद्रास हाईकोर्ट ने निर्धारित शर्तों के साथ दीप प्रज्ज्वलित करने की अनुमति दे दी।
क्या तमिलनाडु सरकार का तर्क?
इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का तर्क है कि संवेदनशील धार्मिक स्थल होने के कारण ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा होने की आशंका है। वहीं, दीप जलाने के समर्थकों का कहना है कि यह केवल धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय है, जिसे बिना किसी भेदभाव के अनुमति मिलनी चाहिए। इस तरह यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक अधिकार और सार्वजनिक शांति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका को पहले से लंबित मामले के साथ जोड़ते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के 6 जनवरी के आदेश को चुनौती दी है। मदुरै पीठ ने 1 दिसंबर, 2025 को एकल पीठ द्वारा दिए गए उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें त्योहार के दिन परंपरागत रूप से दीप प्रज्ज्वलित करने का निर्देश दिया गया था।
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क्या है कार्तिगई दीपम विवाद?
तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्ज्वलित करने से जुड़ा 'दीपम विवाद' तमिलनाडु के मदुरै स्थित प्रसिद्ध तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर धार्मिक परंपराओं और पूजा-अधिकारों को लेकर उत्पन्न विवाद है। यह पहाड़ी हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों के लिए आस्था का केंद्र मानी जाती है। पहाड़ी पर स्थित भगवान मुरुगन का प्राचीन मंदिर हिंदुओं के छह प्रमुख 'अरुपडई वीडु' में शामिल है, जबकि पहाड़ी पर ही एक सूफी दरगाह भी मौजूद है, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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क्यों भड़का विवाद?
विवाद तब गहराया जब कुछ हिंदू संगठनों ने पहाड़ी की चोटी पर पारंपरिक धार्मिक रीति के तहत दीप प्रज्ज्वलित करने की अनुमति मांगी। उनका कहना था कि यह वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। दूसरी ओर, कुछ पक्षों ने इस पर आपत्ति जताते हुए आशंका व्यक्त की कि इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। मामला अदालत पहुंचा और मद्रास हाईकोर्ट ने निर्धारित शर्तों के साथ दीप प्रज्ज्वलित करने की अनुमति दे दी।
क्या तमिलनाडु सरकार का तर्क?
इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार का तर्क है कि संवेदनशील धार्मिक स्थल होने के कारण ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा होने की आशंका है। वहीं, दीप जलाने के समर्थकों का कहना है कि यह केवल धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय है, जिसे बिना किसी भेदभाव के अनुमति मिलनी चाहिए। इस तरह यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक अधिकार और सार्वजनिक शांति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
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