प्राइवेट यूनिवर्सिटी कानून में संशोधन का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने कहा- अंतरिम आदेश से सरकार की विधायी प्रक्रिया नहीं रुकेगी
झारखंड हाईकोर्ट ने साफ किया है कि झारखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2024 में संशोधन करने की राज्य सरकार की संवैधानिक शक्ति पर अदालत के अंतरिम आदेश का कोई असर नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि किसी विधायिका को कानून बनाने या उसमें संशोधन करने से रोकना सामान्य न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
प्राइवेट यूनिवर्सिटी कानून में संशोधन का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने कहा- अंतरिम आदेश से नहीं रुकेगी सरकार की विधायी प्रक्रिया
झारखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2024 में संशोधन का रास्ता अब साफ हो गया है. राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट.
Published : July 25, 2026 at 12:29 PM IST
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि झारखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2024 में संशोधन करने की राज्य सरकार की संवैधानिक शक्ति पर अदालत के अंतरिम आदेश का कोई असर नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने कहा कि किसी विधायिका को कानून बनाने या उसमें संशोधन करने से रोकना सामान्य न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है. अदालत की भूमिका कानून बनने के बाद उसकी संवैधानिक वैधता की जांच करने तक सीमित रहती है. यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरला बिरला विश्वविद्यालय समेत कई निजी विश्वविद्यालयों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की.
कई धाराओं में प्रस्तावित है संशोधन- एजी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय ने अदालत को बताया कि झारखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2024 की कई धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इनमें वे प्रावधान भी शामिल हैं, जिन्हें निजी विश्वविद्यालयों ने अपनी याचिकाओं में चुनौती दी है. महाधिवक्ता ने यह भी कहा कि 28 जनवरी 2025 के अंतरिम आदेश के बाद संशोधन विधेयक को विधानसभा में पेश करने को लेकर कुछ आशंकाएं बनी हुई थीं.
पुराना आदेश सिर्फ अधिसूचना तक सीमित- HC
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 28 जनवरी 2025 का अंतरिम आदेश केवल 11 दिसंबर 2024 की अधिसूचना के आधार पर आगे की कार्रवाई पर रोक से जुड़ा था. इसका राज्य विधानसभा की कानून बनाने या कानून में संशोधन करने की संवैधानिक शक्ति से कोई संबंध नहीं है. अदालत ने कहा कि उसके पहले के आदेश में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे सरकार संशोधन विधेयक लाने या संबंधित कानून में बदलाव पर विचार करने से रोकी गई हो.
शिकायतें दूर हुईं तो अंतरिम राहत पर होगा पुनर्विचार
खंडपीठ ने यह भी कहा कि यदि प्रस्तावित संशोधनों के बाद याचिकाकर्ताओं की शिकायतें पूरी तरह या काफी हद तक दूर हो जाती हैं, तो 28 जनवरी 2025 को दिए गए अंतरिम संरक्षण को जारी रखने की जरूरत पर भी विचार किया जाएगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां उन सभी समान मामलों पर लागू होंगी, जिनमें इसी तरह के अंतरिम आदेश पहले दिए गए हैं.
मॉनसून सत्र में आ सकता है संशोधन विधेयक
महाधिवक्ता ने अदालत को जानकारी दी कि प्रस्तावित संशोधनों पर राज्य विधानसभा के मौजूदा मॉनसून सत्र में विचार किए जाने की संभावना है. इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर तय कर दी. इस मामले में निजी विश्वविद्यालयों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, इंद्रजीत सिन्हा के अलावा तान्या सिंह, अंकित विशाल और प्राण प्रणय पक्ष रख रहे हैं.
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