अमेरिका का नया रूसी तेल‑गैस प्रतिबंध, भारत पर 100% टैरिफ का जोखिम
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस से तेल‑गैस खरीद पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला 'सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पास कर दिया, जिसे अब राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रतीक्षा है। इस कानून में भारत और चीन दोनों को लक्षित किया गया है, पर विशेषज्ञों का मानना है कि असली मकसद भारत को आर्थिक दबाव में लाना है। यह कदम भारत‑अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस से तेल-गैस खरीद पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने वाले अमेरिकी कानून 'सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को पारित कर दिया है। इस एक्ट को अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी के लिए भेजा गया है। इस एक्ट में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों भारत और चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
वॉशिंगटन: अमेरिका की संसद ने रूस से तेल-गैस खरीद पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने वाला बिल पारित किया है। इस कानून का उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को जारी रखने के लिए मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को कम करना है। इसके तहत रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं और रूस के सैन्य अभियानों का समर्थन करने वाली विदेशी संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि इस कानून के तहत भारत और चीन पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि इस कानून का असली उद्देश्य भारत को नुकसान पहुंचाना है, न कि चीन को।
भारत है असली निशाना: माइकल कुगेलमैन
अटलांटिक काउंसिल में सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि पिछले एक साल से ज्यादा समय में अमेरिका-भारत संबंधों को कई बड़े झटके लगे हैं, और रूस पर नए प्रतिबंधों वाला बिल शायद अब तक का सबसे बड़ा झटका हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें इस बात का भी जोखिम है कि अमेरिका चीन के मुकाबले भारत पर ज्यादा टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है, जबकि चीन रूस से ज़्यादा तेल खरीदता है। अमेरिकी सरकार जानती है कि ग्लोबल इकॉनमी पर चीन का बहुत ज्यादा दबदबा है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर गंभीर असर: इवान फीगेनबाम
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के पूर्व एडवाइजर और भारत-अमेरिका परमाणु समझौते में अहम भूमिका निभाने वाले इवान ए फीगेनबाम ने कहा कि चूंकि यहां भारत पर उंगली उठाई जा रही है, इसलिए मैं वही बात फिर से कहूंगा जो मैंने पिछले साल कई बार कही थी, जब पीटर नवारो ने अजीब (और गलत) तरीके से यूक्रेन युद्ध को "मोदी का युद्ध" कहा था। उन्होंने आगे कहा कि असलियत यह है कि भारत इस युद्ध को अपनी वजह से पैदा हुई समस्या नहीं मानता। इसलिए नई दिल्ली में अमेरिका की इस बात को सीधे दबाव, भारत की विदेश नीति में भारी दखल, भारत की आर्थिक जरूरतों के हिसाब से अव्यावहारिक और पश्चिम की उस सामूहिक नाकामी के लिए "भारत को दोषी ठहराने" की एक चालाक कोशिश के तौर पर देखा जाता है, जिसमें वे मॉस्को को यूक्रेन पर युद्ध रोकने के लिए मनाने में नाकाम रहे।
अमेरिका की 25 साल की मेहनत बेकार
उन्होंने आगे कहा कि रणनीतिक नजरिए से देखें तो अगर आप अमेरिका-भारत संबंधों को अहमियत देते हैं, तो यह अमेरिका के लिए फायदेमंद बात नहीं होगी। और न ही भारत को चीन के साथ एक ही श्रेणी में रखना सही है। मोटे तौर पर कहें तो, पिछले डेढ़ साल में अमेरिका-भारत संबंधों को बनाने के लिए 25 सालों से चली आ रही दोनों पार्टियों की कोशिशें (जिनमें ट्रंप का पहला कार्यकाल भी शामिल है) बेकार हो गई हैं। हमने उस रिश्ते को फिर से राजनीतिक रंग दे दिया है जो नई दिल्ली और वॉशिंगटन दोनों जगह राजनीति से दूर था और अब तक हमने तीसरे देशों के साथ अपने रिश्तों को लेकर अपनी-अपनी आपत्तियों को इस तरह से द्विपक्षीय संबंधों पर असर नहीं डालने दिया था।
लेखक के बारे मेंप्रियेश मिश्रप्रियेश मिश्र नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर (Principal Digital Content Producer) के पद पर कार्यरत हैं। वे नवभारत टाइम्स की दुनिया (World) सेक्शन से जुड़े हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनका 10 साल का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टिंग और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। प्रियेश मिश्र ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। प्रियेश मिश्र ने मार्च 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था।
प्रियेश मिश्र के पास वैश्विक घटनाक्रम, युद्ध, सैन्य संघर्ष, राजनयिक तनाव, कूटनीति जैसे विषयों पर न्यूज कवरेज का व्यापक अनुभव है। उन्होंने पिछले 5 वर्षों में आर्मेनिया-अजरबैजान के युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020-2024, इजरायल-हमास गाजा युद्ध, ईरान-इजरायल संघर्ष, भारत-पाकिस्तान संघर्ष ऑपरेशन सिंदूर, तालिबान-पाकिस्तान संघर्ष, चीन-ताइवान विवाद, वेनेजुएला संकट जैसे वैश्विक घटनाक्रम का कवरेज किया है।
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