प्राइवेट स्कूल संचालक सुप्रीम कोर्ट में जाएगें आरटीई के खिलाफ
झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने आरटीई नियमावली-2019 और 2025 को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मान्यता के लिए आवेदन ले रही है, जबकि संबंधित कोड जारी नहीं कर रही।

सौजन्य से:- Live Hindustan
आरटीई नियमावली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे प्राइवेट स्कूल संचालक
झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने आरटीई नियमावली-2019 और 2025 को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। बैठक में सदस्य और स्कूल संचालक शामिल हुए। आरोप है कि राज्य सरकार मान्यता के लिए आवेदन ले रही है, जबकि संबंधित कोड जारी नहीं कर रही।
झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने आरटीई प्रथम संशोधित नियमावली-2019 एवं द्वितीय संशोधित नियमावली-2025 को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अलग से याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। यह फैसला रविवार को गांधी सेवा सदन में आयोजित संगठन की धनबाद जिला इकाई की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता जिला सचिव इरफान खान ने की। इसमें जिले के आरटीई से गैर-मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के संचालकों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक को संबोधित करते हुए इरफान खान ने कहा कि राज्य में निजी विद्यालयों के समक्ष कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।
सरकारी आदेशों की समस्या
उन्होंने बताया कि आरटीई प्रथम संशोधित नियमावली-2019 के खिलाफ संगठन के प्रदेश महासचिव राम रंजन कुमार सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। मई 2025 में आए फैसले के बाद द्वितीय संशोधित नियमावली-2025 लागू की गई, लेकिन मान्यता के मूल मानकों में कोई बदलाव नहीं किया गया। विशेष रूप से शहरी क्षेत्र में 75 डिसमिल और ग्रामीण क्षेत्र में एक एकड़ भूमि की अनिवार्यता यथावत रखी गई, जबकि केवल चालान राशि और सिक्यूरिटी मनी की शर्त हटाई गई।
आवेदन प्रक्रिया में कठिनाई
उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्टे देते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने 1 जून से 31 अगस्त 2026 तक वर्ष 2019 के बाद established विद्यालयों से मान्यता आवेदन लेने का आदेश जारी कर दिया है। उनका आरोप है कि सरकार इन विद्यालयों से यू-डायस कोड की मांग तो कर रही है, लेकिन कोड जारी नहीं कर रही। वहीं, 2019 से पहले संचालित विद्यालयों के लिए मान्यता आवेदन का पोर्टल भी नहीं खोला गया है।
आगे की रणनीति
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 2019 के बाद खुले विद्यालयों की सूची तैयार कर यू-डायस कोड जारी कराने के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जाएगी। साथ ही झारखंड के सभी गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची के साथ सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दाखिल कर आरटीई की दोनों संशोधित नियमावलियों को चुनौती दी जाएगी। संगठन भूमि की अनिवार्यता समाप्त करने तथा सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक किसी भी विद्यालय पर आरटीई मान्यता के लिए आवेदन का दबाव नहीं बनाने की मांग करेगा। बैठक में रंजीत कुमार मिश्रा, विशाल कुमार श्रीवास्तव, एसपी सिन्हा, धनेश्वर ठाकुर, किशोर महतो, कुमार चंदन, कृपा जी, असरार आलम समेत एसोसिएशन के कई पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल थे।
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