गुजरात हाईकोर्ट ने कहा, कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर भूमि हड़पने की शिकायत दर्ज करना आत्महत्या के लिए नहीं
गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया, जिसमें उस पर भूमि हड़पने की शिकायत दर्ज कर मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था। अदालत ने कहा कि कानून के तहत उपलब्ध वैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए शिकायत दर्ज करना आत्महत्या के लिए नहीं माना जा सकता है।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर भूमि हड़पने की शिकायत दर्ज करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
Praveen Mishra
26 Jun 2026 2:09 PM IST
गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज उस एफआईआर को रद्द कर दिया, जिसमें उस पर भूमि हड़पने (Land Grabbing) की शिकायत दर्ज कर मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया था। अदालत ने कहा कि कानून के तहत उपलब्ध वैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए शिकायत दर्ज करना मात्र इस आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाना (Abetment of Suicide) नहीं माना जा सकता कि बाद में संबंधित व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली।
2026 LiveLaw (Guj) 175 में जस्टिस पी. एम. रावल की एकलपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया, भड़काया या जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा की कि उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प न बचा हो।
मामले में याचिकाकर्ता ने आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 506(2) (आपराधिक धमकी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी। आरोप था कि याचिकाकर्ता ने मृतक के खिलाफ भूमि हड़पने का मामला दर्ज कर उसे लगातार प्रताड़ित किया, जिससे उसने 7 मई 2021 को आत्महत्या कर ली।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह मूल भूमि मालिक का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक था और उसने भूमि हड़पने संबंधी कानून के तहत वैधानिक कार्रवाई की थी। मृतक की अग्रिम जमानत याचिका सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी थी और उसने हाईकोर्ट से भी अपनी याचिका वापस ले ली थी। इसके बाद उसने आत्महत्या कर ली।
अदालत ने एफआईआर और रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि अधिक से अधिक यह कहा जा सकता है कि मृतक उसके खिलाफ शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही और उससे जुड़ी सामाजिक बदनामी के कारण तनाव में था। लेकिन केवल तनाव या सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचना, आईपीसी की धारा 107 के तहत 'उकसावे' के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड से प्रतीत होता है कि मृतक ने आपराधिक कार्यवाही पर अत्यधिक संवेदनशील (hypersensitive) प्रतिक्रिया दी। याचिकाकर्ता के आचरण को ऐसा नहीं माना जा सकता जो सामान्य परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए विवश कर दे।
इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। चूंकि प्रथमदृष्टया आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई मामला नहीं बनता, इसलिए अदालत ने एफआईआर को रद्द कर दिया।
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