सुप्रीम कोर्ट में सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने पर सुनवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने की मांग पर सुनवाई की और अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख तय की। सोनम ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर खुद को बेकसूर बताया और जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं होने का तर्क दिया।

सौजन्य से:- ndtv.in
- सुप्रीम कोर्ट सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने की याचिका पर 14 जुलाई को अगली सुनवाई करेगी
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जमानत गलती से गलत धारा पर दी गई थी, लेकिन यह मामला गंभीर है
- सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर खुद को बेकसूर बताया और ट्रायल में पूरा सहयोग करने की बात कही है
सुप्रीम कोर्ट में इंदौर के राजा रघुवंशी मर्डर केस में सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करने वाली याचिका पर अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी. आज हुई सुनवाई के दौरान SG तुषार मेहता ने दलील देते हुए कहा कि ये सीरियस मैटर है. सोनम की गिरफ्तारी के आधार दिए गए थे. गलती सिर्फ धारा लिखने में हुई थी और उसी के आधार पर सोनम को जमानत दे दी गई.
'पहले के दो फैसले देखने होंगे'
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को विस्तार से सुनेगी क्यों कि ये विचार करने का विषय है. अदालत ने कहा कि उसके पहले के दो फैसले हैं. देखना होगा कि दो फैसलों में मतभेद होने के कारण क्या इसे बड़ी बेंच को भेजा जाए. अदालत ने तुषार मेहता से कहा कि वह इसमें लिखित दलीलें दाखिल करें. इस पर तुषार मेहता ने कहा कि यहां ये मुद्दा नहीं है. यहां लिखित में आधार दिए गए थे. हमने सारे दस्तावेज दाखिल किए हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये देखना होगा कि जो आधार दिया गया वो टिकने वाला है या नहीं. अगर आधार गलत है तो जमानत आदेश चला जाएगा.
आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता
इससे पहले सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर खुद को बेकसूर बताते हुए कहा था कि उसे झूठे तरीके से फंसाया गया है. अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित है,जिन्हें अदालत में संदेह से परे साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी है. केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता इसीलिए अदालत के पास उसकी जमानत रद्द करने का कोई आधार नहीं है. वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है. वहीं मेघालय सरकार ने उसकी जमानत रद्द करने की मांग की है.
सोनम रघुवंशी ने कही सहयोग करने की बात
सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि वह ट्रायल में पूरा सहयोग कर रही है और ट्रायल में यदि कोई देरी हुई है तो उसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है. सोनम ने अदालत से कहा कि उसे 27 अप्रैल 2026 को जमानत मिली थी और 28 अप्रैल 2026 को वह जेल से रिहा हो गई थी. ऐसे में उसे दोबारा जेल भेजने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि जमानत रद्द करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार इस मामले में मौजूद नहीं हैं .
जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने यह आरोप नहीं लगाया है कि उसने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है. साथ ही, मामले में अब उससे कोई बरामदगी बाकी नहीं है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.इसलिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी नहीं है. वह फिलहाल जमानत की शर्तों के अनुसार शिलांग में रह रही है.
'मुझे झूठा फंसाया गया'
सोनम ने अपने बचाव में यह भी कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है. बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सोनम बेल पर बाहर आ चुकी है तो वो उसकी जमानत रद्द करने को इच्छुक नहीं है. हालांकि कोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.
ये भी पढ़ें-सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम रोक का आदेश देने को इच्छुक नहीं
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