सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया याचिका कि नहीं, केंद्र को तीन महीने में नया टेंडर करना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और विदेश मंत्रालय को कहा है कि वह ३ महीने के भीतर नया टेंडर पूरा करे।

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट: MEA वीजा आउटसोर्सिंग टेंडर पर केंद्र की याचिका पर विचार करने से किया इनकार
शीर्ष अदालत ने विदेश मंत्रालय को बिना रुकावट सेवाएं जारी रखते हुए 3 महीने के भीतर नया टेंडर पूरा करने का निर्देश दिया है.
By Sumit Saxena
Published : July 20, 2026 at 3:03 PM IST
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. हाई कोर्ट ने अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा में भारतीय दूतावासों में कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा सेवाओं को आउटसोर्स करने के लिए निजी कंपनियों को दिए गए टेंडर को रद्द कर दिया था.
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे. पीठ के सामने केंद्र सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा. सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया.
सुनवाई के दौरान मेहता ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया को रद्द करके गलती की है. क्योंकि, मूल्यांकन के नियम हर बोलीदाता की व्यक्तिगत योग्यता के आधार पर लागू किए गए थे.
इस पर पीठ ने केंद्र सरकार के रुख को लेकर सवाल पूछे और मौखिक रूप से टिप्पणी की कि सरकार ने (हाई कोर्ट के सामने) सही आधार और कारण पेश न करके खुद ही इस आदेश को बुलावा दिया था. हालांकि, मेहता ने तर्क दिया कि अलग-अलग टेंडरों में नंबर देने की प्रणाली को व्यावहारिक रूप से समझने की जरूरत है.
यह तर्क दिया गया कि यदि टेंडर की शर्तों को हूबहू पढ़ा जाए, तो बोलियों की जांच के क्रम के आधार पर मनमाने नतीजे सामने आ सकते हैं. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी की कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भी ठीक इसी चिंता और गड़बड़ी को रेखांकित किया था.
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने विदेश मंत्रालय को नई टेंडर प्रक्रिया जल्द से जल्द, तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया. पीठ ने साफ किया कि विदेश मंत्रालय को हाई कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित करना होगा. कांसुलर (दूतावास) सेवाओं में कोई रुकावट न आए, इसके लिए पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश में थोड़ा बदलाव किया.
पीठ ने विदेश मंत्रालय को अनुमति दी कि वह नई टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक या तो वर्तमान सेवा प्रदाताओं को बनाए रखे या अस्थायी रूप से उन एल-1 बोलीदाताओं को नियुक्त करे जिनके अनुबंध पहले रद्द कर दिए गए थे. इसके साथ ही पीठ ने विदेश मंत्रालय को इन चारों भारतीय मिशनों (दूतावासों) में बिना किसी रुकावट के सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए कोई भी अन्य उचित अंतरिम व्यवस्था करने का अधिकार दिया.
बता दें कि हाई कोर्ट ने निजी कंपनियों को दिए गए सीपीयूपी सेवाओं के आउटसोर्सिंग टेंडर को रद्द करते हुए केंद्र सरकार को नए सिरे से बोलियां आमंत्रित करने के लिए प्रस्ताव का अनुरोध जारी करने का निर्देश दिया था.
इसे भी पढ़ेंः
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
ताज़ा ख़बरें
- ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026: जयराम रमेश ने केंद्र की योजना का किया समर्थन
- मेटा को 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए
- दोषियों की अपीलों में देरी को माफ करने का मौका, न्यायपालिका ने दी दिशानिर्देश
- JPSC परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
- शासन को आरोप तय करने में लगे 10 साल, अदालत में पहुंचते ही निरस्त
- उत्तर प्रदेश सरकार ने मृत कर्मचारियों के पुत्रों को नौकरी देने का निर्देश दिया
- JPSC परीक्षा का सुप्रीम कोर्ट में विवाद: परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग
- बच्चों की शिक्षा पर भार : शिक्षक भर्ती के लंबित मुकदमों के लिए स्पेशल कोर्ट, संघ ने दी मांग

