बुलडोजर गरजेगा सेटबैक पर अवैध निर्माणों के खिलाफ
सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई 14 जुलाई को होने वाली है। इससे पहले आवास एवं विकास परिषद ने बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी फिर से करनी शुरू कर दी है। जिन लोगों ने आंशिक रूप से हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद भी सेटबैक पर किए गए अवैध निर्माण को नहीं हटाया अब परिषद उन पर कार्रवाई करने जा रहा है।

सौजन्य से:- Live Hindustan
Meerut News: सेंट्रल मार्केट : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले अवैध निर्माणों पर गरजेगा बुलडोजर
Meerut News: मेरठ में 14 जुलाई को सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई होनी है। आवास एवं विकास परिषद ने सेटबैक से जुड़े अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जिन लोगों ने कार्रवाई नहीं की, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
Meerut News: मेरठ। सेंट्रल मार्केट मामले में 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इसे देखते हुए आवास एवं विकास परिषद ने एकबार फिर से सेटबैक खाली कराने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों द्वारा जल्द ही पुलिस बल की मांग की जाने वाली है। जिन लोगों ने आंशिक रूप से हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद भी सेटबैक पर किए गए अवैध निर्माण को नहीं हटाया अब परिषद उन पर कार्रवाई करने जा रहा है। रिपोर्ट तैयार करके सुप्रीम कोर्ट में पेश की जानी है। नौ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीनगर आवासीय योजना संख्या-7 में आवासीय और कॉमर्शियल भवनों के सेटबैक खाली कराने के आदेश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने भवन स्वामियों को स्वयं सेटबैक खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। इसके बाद परिषद को सेटबैक खाली कराने थे। इसके लिए परिषद ने न केवल लोगों को नोटिस दिए बल्कि तीन दिन तक अभियान चलाकर 100 से ज्यादा भवनों के सेटबैक को आंशिक रूप से तोड़ा गया। अधिकारियों ने स्वयं अवैध निर्माण ध्वस्त करने के लिए तीन से सात दिन का वक्त दिया लेकिन कुछ लोगों ने तो सेटबैक पर किए गए अवैध निर्माण ध्वस्त कराना शुरू कर दिया। बाकियों ने अभी तक सेटबैक खाली नहीं किए हैं।इस मामले की सुनवाई 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होनी है। इससे पहले परिषद अधिकारियों ने बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी फिर से करनी शुरू कर दी है। मंगलवार को इस संबंध में उच्चाधिकारियों की बैठक होगी और उसके बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
लेखक के बारे में
Rajdeep Jakharशॉर्ट बायो राजदीप जाखड़ पिछले 16 साल से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय है और वर्तमान में हिन्दुस्तान में खेती-किसानी के साथ ही किसान संगठनों की भी कवरेज कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
राजदीप जाखड़ भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान मेरठ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में खेती-किसानी और किसान संगठन बीट कवर कर रहे हैं। 2023 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने प्रिंट एवं डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
कॅरियर का सफर
राजदीप जाखड़ ने कॅरियर की शुरुआत 2010 में अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबार से की जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2023 में हिन्दुस्तान’ से जुड़े और वर्तमान में प्रिंट मीडिया के साथ डिजिटल कंटेंट में भी योगदान दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
एजूकेशन और पॉलिटिकल साइंस में एमए, बीएड और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट होने के कारण राजदीप को पत्रकारिता का अनूठा संयोजन मिला है। इन सभी के संयोजन से वे किसान संगठन और इससे जुड़ी राजनीति को बेहतर ढंग से समझते हैं।
खेती-किसान, किसान संगठन
राजदीप को खेतीबाड़ी से संबंधित विषयों के साथ किसान संगठनों की गहरी समझ है। कई बड़े किसान नेताओं के इंटरव्यू किए हैं। राजदीप का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता है और हमारा लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।
विशेषज्ञता
खेती-किसानी, किसान संगठन, विकास, ट्रांसपोर्ट।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश: चार नए मुख्य न्यायाधीश!

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बड़ी सिफारिश, 4 हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस नियुक्त

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का वार्षिक सारांश: जांच और कानूनी कार्यवाही में नए मानक

गुरुग्राम में चलेगा बुलडोजर, टूटेंगे अवैध आशियाने

सुप्रीम कोर्ट ने योग्यता अंकों के निर्धारण और साक्षात्कार बेंचमार्क में बदलाव पर दिया निर्णय

अनुसमर्थन की गहराई: सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया मूल्यांकन का महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने कर दायित्व को वैध ठहराया, लेकिन पूर्वव्यापी जुर्माना नहीं माना

अगर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माननी तो 5 लाख लोगों का रोजगार होगा असुरक्षित
ताज़ा ख़बरें
- सामग्री का प्रमाण नहीं है दस्तावेज़ प्रदर्शन को केवल चिह्नित करना: सुप्रीम कोर्ट
- दस्तावेज़ों का प्रदर्शन करने से सामग्री का प्रमाण नहीं: सुप्रीम कोर्ट
- मप्र के बाहर ट्रस्ट कितने फायदे के हैं?
- निवारक निरोध की गलत व्याख्या गंभीर परिणामों की ओर ले जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सैन्य प्रशिक्षण में विकलांग कैडेटों को मिलेगा आरक्षण
- सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता प्रक्रिया से परिवार के सदस्यों को मिली उम्मीद
- सुप्रीम कोर्ट की बात, रानी-प्रिया कपूर विवाद आपसी सहमति से सुलझ सकता है
- सोशल मीडिया पर अदालत की सुनवाई के वीडियो की साझा पर रोक

