दोषी बेटे को उम्रकैद, एक लाख रुपये का जुर्माना
गाजियाबाद के मोदीनगर में संपत्ति विवाद में अपने पिता और भाई की हत्या करने वाले सुमित उर्फ बबलू को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सौजन्य से:- Jagran
अदालत ने कहा... पिता-भाई ही नहीं, पवित्र रिश्ते का भी किया कत्ल; दोषी बेटे को उम्रकैद
गाजियाबाद के मोदीनगर में संपत्ति विवाद में अपने पिता और भाई की हत्या करने वाले सुमित उर्फ बबलू को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषी पर एक लाख रुप ...और पढ़ें
HighLights
- गाजियाबाद में पिता-भाई की हत्या पर उम्रकैद की सजा।
- संपत्ति विवाद में फावड़े से की थी निर्मम हत्या।
- दोषी सुमित उर्फ बबलू पर एक लाख का जुर्माना भी।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। गाजियाबाद में मोदीनगर के पैंगा गांव में संपत्ति विवाद में अपने पिता और भाई की फावड़े से निर्मम हत्या करने वाले सुमित उर्फ बबलू को अदालत ने बृहस्पतिवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे दो वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
सत्र न्यायाधीश विनोद सिंह रावत ने सजा सुनाते हुए कहा कि दोषी ने केवल अपने पिता और भाई की ही हत्या नहीं की, बल्कि पिता-पुत्र और भाई जैसे पवित्र रिश्तों की भी हत्या कर दी।
खुद को अपमानित समझता था छोटा भाई
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद शर्मा ने बताया कि पैंगा गांव के प्रीतम ने पुश्तैनी जमीन का कुछ हिस्सा छोटे बेटे सुमित को बोने के लिए दिया हुआ था। शेष जमीन को बड़ा बेटा सुभाष बो रहा था। वह सुभाष के साथ ही रह रहे थे। प्रीतम को पेंशन भी मिल रही थी। हिस्सा कम मिलने पर छोटा भाई खुद को अपमानित समझता था।
बृहस्पतिवार को अदालत ने कहा कि यह दोहरा हत्याकांड बेहद नृशंस और समाज को झकझोर देने वाला है। दोषी ने संपत्ति के लालच में अपने ही पिता प्रीतम और भाई सुभाष की फावड़े से कई वार कर हत्या कर दी थी।
मुकदमे के दौरान यह भी साबित हुआ कि वारदात की वजह पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद था। मृतक पिता ने अपनी संपत्ति का वसीयतनामा सुभाष के नाबालिग बच्चों के पक्ष में कर दिया था।
इसके अलावा 13 सितंबर 2018 को सिविल कोर्ट ने भी अंतरिम आदेश देकर दोषी को संपत्ति में हस्तक्षेप करने से रोक दिया था। इसी रंजिश में उसने 23 दिसंबर 2018 को दोनों की हत्या कर दी।
अदालत से की फांसी की मांग
सजा पर बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत से दोषी को फांसी देने की मांग की। अभियोजन का तर्क था कि दोषी ने लालच में अपने पिता और भाई की निर्मम हत्या कर परिवार को तबाह कर दिया। उसके भाई के छोटे बच्चे अनाथ हो गए और परिवार का सहारा खत्म हो गया।
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि दोषी का पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह अपेक्षाकृत कम उम्र का है। उसकी नौ व 13 वर्ष की दो बेटियां हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि घटना पारिवारिक विवाद और गुस्से का परिणाम थी।
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पिता और भाई की हत्या का कृत्य अत्यंत जघन्य
अदालत ने कहा कि संपत्ति के लालच में अपने ही पिता और भाई की हत्या का कृत्य अत्यंत जघन्य, नैतिक रूप से निंदनीय और समाज को झकझोर देने वाला है। ऐसे व्यक्ति को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि समाज में कोई भी इस तरह की क्रूरता करने का साहस न करे।
ऐसी सजा समाज को यह संदेश भी देती है कि इस प्रकार के अपराध किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रहेगा।
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