मुंबई अदालत के फर्जी आदेश के सातवें आसमान की दास्तान, भारतीय कारोबारी को अपराधी साबित करने के लिए दुबई में हुआ था पेश
मुंबई अदालत के फर्जी आदेश के एक सनसनीखेज मामले में यूएई के दो नागरिकों समेत छह लोगों पर केस दर्ज हुआ। वे अपने विरोधी पर दोस्ताना कोर्ट का आदेश बनाकर अदालत में पेश किया था।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a5af71971cbe191fc035bd4","slug":"mumbai-court-fake-order-present-in-uae-court-shocking-scam-2026-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mumbai: मुंबई कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर दुबई की अदालत में पेश किया, यूएई के दो नागरिकों समेत छह पर केस","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Mumbai: मुंबई कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर दुबई की अदालत में पेश किया, यूएई के दो नागरिकों समेत छह पर केस
Sat, 18 Jul 2026 09:16 AM IST
नितिन गौतम
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 18 Jul 2026 09:16 AM IST
सार
फर्जीवाड़ा करने वालों के हौंसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में आरोपियों ने मुंबई कोर्ट का ही एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश कर दिया। आइए जानते हैं कि क्या है ये सनसनीखेज मामला और कैसे इसका भंडाफोड़ हुआ...
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति के विवाद में बढ़त हासिल करने और एक भारतीय कारोबारी को अपराधी साबित करने के लिए मुंबई की अदालत का फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर मुंबई की कुर्ला पुलिस ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो नागरिकों समेत छह लोगों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और अदालत की मुहर व दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के मुताबिक, खंडाला निवासी वाहिदा हुसैन शत्ताफ की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पति हुसैन मोहम्मद शत्ताफ की छवि खराब करने और संपत्ति विवाद में उनका दावा कमजोर करने के लिए आरोपियों ने मुंबई की अदालत का एक फर्जी आदेश तैयार किया। बाद में इसी दस्तावेज को दुबई की अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब शत्ताफ परिवार को दस्तावेज की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेज की जांच कराई गई।
जांच में ऐसे हुआ खुलासा
जांच के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अदालत के रिकॉर्ड की पड़ताल की और करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में पता चला कि जिस मुकदमे का उल्लेख फर्जी आदेश में किया गया था, वैसा कोई मामला कभी अदालत में चला ही नहीं था। दस्तावेज को असली दिखाने के लिए अदालत के डिजिटल हस्ताक्षर, सरकारी वकील और नोटरी की फर्जी मुहर तथा नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आदेश में हुसैन मोहम्मद शत्ताफ को 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी, पासपोर्ट जालसाजी और हवाला कारोबार में दोषी बताया गया था।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने का भी झूठा दावा किया गया। जबकि वास्तविकता यह थी कि उस समय अदालत में केवल उनके जब्त दोपहिया वाहन को छुड़ाने की अर्जी पर सुनवाई हुई थी। कुर्ला पुलिस ने इस मामले में हुमैद मोहम्मद शत्ताफ और हलीमा सुल्तान अल ओवैस, (दोनों यूएई निवासी) के अलावा मधुकर रविराज विल्सन, केन रिचर्ड विल्सन, रजी अहमद और नोटरी शिवाजी एन. ढांगे को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
विज्ञापन
क्या है पूरा मामला
पुलिस के मुताबिक, खंडाला निवासी वाहिदा हुसैन शत्ताफ की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पति हुसैन मोहम्मद शत्ताफ की छवि खराब करने और संपत्ति विवाद में उनका दावा कमजोर करने के लिए आरोपियों ने मुंबई की अदालत का एक फर्जी आदेश तैयार किया। बाद में इसी दस्तावेज को दुबई की अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब शत्ताफ परिवार को दस्तावेज की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेज की जांच कराई गई।
विज्ञापन
जांच में ऐसे हुआ खुलासा
जांच के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अदालत के रिकॉर्ड की पड़ताल की और करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में पता चला कि जिस मुकदमे का उल्लेख फर्जी आदेश में किया गया था, वैसा कोई मामला कभी अदालत में चला ही नहीं था। दस्तावेज को असली दिखाने के लिए अदालत के डिजिटल हस्ताक्षर, सरकारी वकील और नोटरी की फर्जी मुहर तथा नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आदेश में हुसैन मोहम्मद शत्ताफ को 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी, पासपोर्ट जालसाजी और हवाला कारोबार में दोषी बताया गया था।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने का भी झूठा दावा किया गया। जबकि वास्तविकता यह थी कि उस समय अदालत में केवल उनके जब्त दोपहिया वाहन को छुड़ाने की अर्जी पर सुनवाई हुई थी। कुर्ला पुलिस ने इस मामले में हुमैद मोहम्मद शत्ताफ और हलीमा सुल्तान अल ओवैस, (दोनों यूएई निवासी) के अलावा मधुकर रविराज विल्सन, केन रिचर्ड विल्सन, रजी अहमद और नोटरी शिवाजी एन. ढांगे को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश

निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
ताज़ा ख़बरें
- ममता बनर्जी पर हमला: अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय साप्ताहिक राउंड-अप: 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
- यूपी में खराब कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव ने की सरकार की आलोचना
- भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया: अखिलेश यादव
- स्मृति सभा में शामिल होने पर टिस के दो छात्रों की गिरफ्तारी, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
- मंत्री पटेल ने विपक्ष के आरोपों का दी reply, कहा नहीं ओबीसी आरक्षण घटाया
- क्या भारत में किसी राज्य में धर्म परिवर्तन के लिए सबसे सख्त कानून है?
- ट्रिब्यूनल ने यूपी कार दुर्घटना में मारे गए दंपति के बच्चों को 44 लाख का मुआवजा दिलाया

