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65 वर्षीय वहशी को मृत्युदंड: 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामले में कोर्ट ने सुनाया फांसी का ऐलान

पुणे की स्पेशल कोर्ट ने नासरापुर में तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म, और हत्या के मामले में 65 वर्षीय भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' बताते हुए कहा है कि अपराध की क्रूरता, आरोपी का आपराधिक इतिहास, और पीड़िता की असहाय स्थिति मौत की सजा को उचित ठहराती है।

29 जून 2026 को 09:24 am बजे
65 वर्षीय वहशी को मृत्युदंड: 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामले में कोर्ट ने सुनाया फांसी का ऐलान

सौजन्य से:- Amar Ujala

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Nasrapur Case Death Penalty: बच्ची से दुष्कर्म पर मृत्युदंड, 65 साल के वहशी को सजा पर अदालत ने क्या कहा?

Mon, 29 Jun 2026 12:46 PM IST

प्रशांत तिवारी

पीटीआई, पुणे

पीटीआई, पुणे

Published by: प्रशांत तिवारी

Updated Mon, 29 Jun 2026 12:46 PM IST

सार

Nasrapur Case Death Penalty: पुणे की स्पेशल कोर्ट ने नासरापुर में तीन साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के दोषी 65 वर्षीय भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' बताते हुए कहा कि अपराध की क्रूरता, आरोपी का आपराधिक इतिहास और पीड़िता की असहाय स्थिति मौत की सजा को उचित ठहराती है।

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विस्तार

पुणे की एक स्पेशल कोर्ट ने सोमवार को 65 वर्षीय व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई है। उस पर नासरापुर गांव में तीन साल की मासूम बच्ची के अपहरण, उसके साथ बेरहमी से दुष्कर्म और हत्या का आरोप था। इस जघन्य वारदात के बाद पूरे महाराष्ट्र में भारी आक्रोश फैल गया था और कई जगह विरोध-प्रदर्शन हुए थे।

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कोर्ट ने केस को माना 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर'

इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (स्पेशल जज) एस.आर. सालुंखे ने दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई। फैसला सुनाए जाने के समय कांबले कोर्ट में गवाहों के बॉक्स (विटनेस बॉक्स) में मौजूद था।

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फैसला सुनते ही भावुक हुआ पीड़ित परिवार

जैसे ही अदालत ने मौत की सज़ा का ऐलान किया, कोर्ट में मौजूद पीड़ित परिवार फूट-फूटकर रो पड़ा। फैसले का मुख्य हिस्सा पढ़ते हुए जज सालुंखे ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत अभियोजन पक्ष के आरोपों को पूरी तरह साबित करते हैं और मामले में दोषी के खिलाफ गंभीर परिस्थितियां स्पष्ट रूप से स्थापित होती हैं।

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आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड का भी हुआ जिक्र

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'यह मामला हत्या और दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों से जुड़ा है। आरोपी का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसके खिलाफ गंभीर मारपीट के मामलों का लंबा इतिहास भी मौजूद है।' अदालत ने 1 मई को हुए इस अपराध के महज 60 दिनों के भीतर, 25 जून को आरोपी को दोषी ठहरा दिया था।

स्नैक्स और बछड़ा दिखाने का दिया था लालच

अभियोजन के अनुसार, भीमराव कांबले ने पुणे जिले के नासरापुर गांव में तीन साल की बच्ची को स्नैक्स देने और नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। इसके बाद वह उसे मवेशियों के बाड़े के पास बने एक शेड में ले गया, जहां उसने बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न और अप्राकृतिक कृत्य किया। बाद में उसका मुंह दबाकर और छाती पर गंभीर चोट पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी।

'अपराध ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया'

जज सालुंखे ने कहा, 'यह अपराध अत्यंत घिनौने और अमानवीय तरीके से किया गया। पीड़िता एक मासूम और पूरी तरह असहाय बच्ची थी। उसकी हत्या केवल अपनी हवस पूरी करने के लिए की गई, जो नैतिक पतन की पराकाष्ठा को दर्शाती है। यह बिना किसी उकसावे के, पूरी तरह सुनियोजित और ठंडे दिमाग से किया गया अपराध था। इसकी क्रूरता ने न केवल न्यायपालिका बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया है।'

ये भी पढ़ें: क्या है ग्रे मैटर? केतन की हत्यारोपी सिया जैसों के दिमाग में छिपा साइको किलर जो किसी को मार सकता है

उम्र को नहीं माना राहत का आधार

अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में सजा कम करने वाली कोई परिस्थिति मौजूद नहीं है। जज ने कहा, 'आरोपी की 65 वर्ष की उम्र ही एकमात्र ऐसा पहलू है जिसका उल्लेख किया जा सकता है, लेकिन मेरे विचार से इसे सजा कम करने का आधार नहीं माना जा सकता। बल्कि, इस मामले में यह अपराध की गंभीरता को और अधिक बढ़ाता है।'

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