पंचकूला: 11 साल पुराने हनीट्रैप मामले में पूर्व एसीपी जैसे सभी 9 आरोपी बरी, साक्ष्यों के अभाव में मिला लाभ
पंचकूला की विशेष अदालत ने वर्ष 2015 के चर्चित हनीट्रैप और कथित 40 लाख रुपये रंगदारी मामले में सभी 9 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है, जिसमें पूर्व एसीपी देश बंधु भी शामिल हैं। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने में असफलता के कारण ही उन्हें बरी किया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Panchkula: 11 साल पुराने हनीट्रैप मामले में पूर्व एसीपी समेत सभी नाै आरोपी बरी, साक्ष्यों के अभाव का मिला लाभ
Wed, 29 Jul 2026 08:46 AM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Published by: Nivedita
Updated Wed, 29 Jul 2026 08:46 AM IST
सार
अदालत ने 159 पन्नों के फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो पाया। साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
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विस्तार
वर्ष 2015 के चर्चित हनीट्रैप और कथित 40 लाख रुपये रंगदारी मामले में पंचकूला की विशेष अदालत ने पूर्व एसीपी देश बंधु, दो तत्कालीन पुलिसकर्मियों और मुख्य महिला आरोपी समेत सभी नौ आरोपियों को बरी कर दिया है।
अदालत ने 159 पन्नों के फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो पाया। साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 53 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह मामला पुलिस अधिकारियों के बीच प्रशासनिक विवाद और आपसी रंजिश का परिणाम था। अदालत ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रिश्वत मांगने, रंगदारी वसूलने या आपराधिक साजिश रचने के आरोपों की पुष्टि के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं मिला।
कारोबारी की फेसबुक के माध्यम से महिला से हुई थी दोस्ती
मई 2015 में अंबाला के एक कारोबारी की फेसबुक के माध्यम से एक महिला से दोस्ती हुई थी। बातचीत के बाद महिला ने कारोबारी को पंचकूला स्थित अपने घर बुलाया। इसके बाद महिला ने कारोबारी के खिलाफ चंडीमंदिर थाने में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि बाद में मामला खत्म कराने के नाम पर कारोबारी से 40 से 50 लाख रुपये की मांग की गई। कारोबारी के परिवार की शिकायत के बाद गठित एसआईटी ने मामले की जांच की।
जांच में दुष्कर्म के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी, जिसके बाद कारोबारी के खिलाफ दर्ज मामला रद्द कर दिया गया। इसके बाद महिला, उसके पति, कथित बिचौलियों और कुछ तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। करीब 11 वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
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अदालत ने 159 पन्नों के फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो पाया। साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 53 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह मामला पुलिस अधिकारियों के बीच प्रशासनिक विवाद और आपसी रंजिश का परिणाम था। अदालत ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रिश्वत मांगने, रंगदारी वसूलने या आपराधिक साजिश रचने के आरोपों की पुष्टि के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं मिला।
कारोबारी की फेसबुक के माध्यम से महिला से हुई थी दोस्ती
मई 2015 में अंबाला के एक कारोबारी की फेसबुक के माध्यम से एक महिला से दोस्ती हुई थी। बातचीत के बाद महिला ने कारोबारी को पंचकूला स्थित अपने घर बुलाया। इसके बाद महिला ने कारोबारी के खिलाफ चंडीमंदिर थाने में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि बाद में मामला खत्म कराने के नाम पर कारोबारी से 40 से 50 लाख रुपये की मांग की गई। कारोबारी के परिवार की शिकायत के बाद गठित एसआईटी ने मामले की जांच की।
जांच में दुष्कर्म के आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी, जिसके बाद कारोबारी के खिलाफ दर्ज मामला रद्द कर दिया गया। इसके बाद महिला, उसके पति, कथित बिचौलियों और कुछ तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। करीब 11 वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
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