प्रधान के इस्तीफे की मांग पर क्या पूछे जाएं पीएम मोदी?
सपा सांसद रामगोपाल यादव ने पीएम मोदी से क़ानून बनाने के आश्वासन पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि क्या पहले से क़ानून नहीं था। उन्होंने कहा है कि अपराध करने वालों को दंडित करने के लिए क़ानून पहले से ही था, लेकिन अब क्या होगा।

सौजन्य से:- ABP News
'क्या पहले कानून नहीं था...', अखिलेश के चाचा राम गोपाल यादव ने PM मोदी के आश्वासन पर उठाए सवाल
Student Protest: नीट पेपर लीक को लेकर हो रहे छात्रों के आंदोलन पर विपक्ष ने सरकार को घेरा हैं. सपा-कांग्रेस ने साफ कहा कि सरकार को धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेना चाहिए.
नीट परीक्षा को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है. जिस पर तमाम सियासी दलों की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही हैं. विपक्षी दलों ने साफ़ कर दिया है कि विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग पर अड़ा है. सरकार जवाबदेही तय करनी होगी. बच्चों का दर्द समझना चाहिए.
सपा सांसद रामगोपाल यादव ने सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने पर कहा कि समाजवादी पार्टी कभी भी अनशन के पक्ष में नहीं रही है. उन्होंने कहा कि डॉ लोहिया हमेशा अनशन का विरोध करते थे. जब उन्हें ज्यादा कहा तो उन्होंने कहा कि आप क्रमवार कर सकते हो कि 24 घंटे के लिए एक आदमी बैठे और फिर दूसरा बैठे. सीजेपी के साथ सरकार की बैठक पर उन्होंने कहा कि वो तो कल भी हुई थी, विपक्ष अपनी मांगों पर कायम है.
रामगोपाल यादव ने सरकार से पूछा सवाल
सपा सांसद ने कहा कि सोनम वांगचुक ने अपनी अनशन खत्म कर दिया ये अच्छी बात है. सपा ने कभी अनशन का समर्थन नहीं किया है. वहीं पीएम मोदी के नीट परीक्षा को लेकर कड़े क़दम उठाने के आश्वासन पर उन्होंने सवाल किया और पूछा कि "क्या पहले से क़ानून नहीं था? ये अपराध करने वालों को दंडित करने के लिए क़ानून पहले से नहीं था. किसी के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई, इसी नीट को जो किंग-पिंग था उसे कल सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी. क्या कानून बनाएंगे ये?
'पहले इस्तीफा, फिर चर्चा पर आईए'
वहीं कांग्रेस सांसद उज्जवल रमन सिंह ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को दोहराया है. उन्होंने कहा कि क्या सरकार में मानवता नहीं बची हैं, क्या वो हमारे बच्चे नहीं कि हम उनकी बातें सुन सकें. हम तो कहेंगे सरकार से बच्चों की आवाज़, बच्चों का दर्द समझिए और तुरंत इस्तीफा होना चाहिए.
कांग्रेस सांसद ने कहा- "इस्तीफा दीजिए, चर्चा पर आईए, बिना इस्तीफे के चर्चा के जवाबदेही कहां?, आज आपने उच्च शिक्षा सचिव का ट्रांसफर कर दिया. क्या ट्रांसफर पर्याप्त होता है. क्या ट्रांसफ़र सजा माना जाता है? आपने एक महकमे से हटाकर और बड़ा महकमा दे दिया. मतलब एक तरह से आप अपने अधिकारियों को पुरस्कृत कर रहे हैं और छात्र अगर इस्तीफा मांग रहे हैं तो क्या इतनी बड़ी बात है.
दिल्ली में छात्र आंदोलन के बीच अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को दी हवा, कहा- 'जब संविधान बचेगा तभी...'
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