पीएमएलए कोर्ट ने झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की आरोपमुक्ति पर मो़ड़ नहीं दिया
हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपमुक्त नहीं किया गया, अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी। उन्हें अभियोजन जारी रहने के लिए सहमति दिखाई गई।

सौजन्य से:- Live Law
पीएमएलए कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज कर दी
लाइवलॉ न्यूज़ नेटवर्क
9 जून 2026 10:06 पूर्वाह्न IST
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत रांची की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को रांची के बड़गाई इलाके में 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी।
न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया परीक्षण के लिए सामग्री मौजूद थी।
सोरेन ने पिछले साल दिसंबर में डिस्चार्ज याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि उनके खिलाफ आरोप निराधार थे और पर्याप्त सबूतों द्वारा समर्थित नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें मामले में अनावश्यक रूप से फंसाया गया है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए ठोस सबूत नहीं हैं।
ईडी ने आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूत और दस्तावेज मामले की सुनवाई के लिए पर्याप्त हैं। एजेंसी ने अदालत से आरोपमुक्त करने की याचिका खारिज करने और कार्यवाही जारी रखने का आग्रह किया।
मामले के इस चरण में ईडी के तर्क को स्वीकार करते हुए, अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री अभियोजन जारी रखने को उचित ठहराती है।
यह मामला रांची के बड़गाई इलाके में स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। ईडी धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामले की जांच कर रही है।
सोरेन को इस मामले में 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया था, और 28 जून 2024 तक हिरासत में रहे, जब उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए प्रथम दृष्टया टिप्पणी की थी कि यह मानने का कोई कारण नहीं है कि सोरेन दोषी हैं।
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इसका मतलब क्या है
यह निर्णय झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि उन्हें अब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुकदमा चलाने का सामना करना पड़ेगा। अदालत का यह फैसला दर्शाता है कि रिकॉर्ड में पर्याप्त सामग्री मौजूद है जो अभियोजन को जारी रखने के लिए आवश्यक है। इस मामले के भविष्य में कई कानूनी मोड़ आ सकते हैं, जिसमें सोरेन को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।
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