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विवाहिता से अवैध संबंध है अपराध नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्त कांस्टेबल को दिलाई राहत

झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड सशस्त्र पुलिस के एक कांस्टेबल की बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि व्यभिचार अब आपराधिक अपराध नहीं है।

8 जुलाई 2026 को 12:56 am बजे
विवाहिता से अवैध संबंध है अपराध नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने बर्खास्त कांस्टेबल को दिलाई राहत

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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विवाहिता से अवैध संबंध अपराध नहीं: हाईकोर्ट:जैप के कांस्टेबल की बर्खास्तगी का आदेश निरस्त

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झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) के कांस्टेबल भरत पाठक की बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया है। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ‘जोसेफ शाइन बनाम भारत संघ’ फैसले के बाद व्यभिचार अब आपराधिक अपराध नहीं रहा। साथ ही अदालत ने माना कि विभाग ने कांस्टेबल को ऐसे आधार पर बर्खास्त किया, जो विभागीय चार्जशीट का हिस्सा ही नहीं था। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

भरत पाठक 2007 में झारखंड सशस्त्र बल में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त हुए थे। उनके खिलाफ एक महिला ने शिकायत की थी कि दोनों शादीशुदा होने और बच्चे होने के बावजूद उन्होंने उससे शादी की तथा अक्टूबर 2019 से अप्रैल 2023 के बीच शारीरिक संबंध बनाए। बाद में उसे साथ रखने से इंकार कर दिया। शुरुआती जांच के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू हुई। प्राथमिकी भी दर्ज हुई, फिर उन्हें निलंबित कर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

याचिकाकर्ता के तर्क से मिली राहत: सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दलील दी कि बर्खास्तगी का आदेश ऐसे आरोप पर आधारित है, जो कभी विभागीय चार्जशीट में था ही नहीं।

शिकायतकर्ता ने कोर्ट में बयान के अलावा संबंध के सबूत नहीं दिए

अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता के बयानों के अलावा कोई स्वतंत्र या दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया गया। न कथित शादी का कोई प्रमाण था, न होटल की सीसीटीवी फुटेज और न ही किराये के मकान में साथ रहने का कोई सबूत दिया गया। अदालत ने कहा कि पुलिस विभाग के अनुशासनात्मक और अपीलीय अधिकारियों ने बिना ठोस साक्ष्य के कांस्टेबल को सेवा से हटाने जैसी गंभीर सजा दे दी, जो अधिकारों का दुरुपयोग है। इसी आधार पर अदालत ने बर्खास्तगी और उससे जुड़े सभी विभागीय आदेश निरस्त कर दिए।

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