सेबी ने सहारा कर्मचारियों के लिए मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सहारा इंडिया कमर्शियल कारपोरेशन लिमिटेड के चार प्रबंधकों और कंपनी सेक्रेटरी को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

सौजन्य से:- Jagran
Sahara News: सहारा से जुड़ा ₹14 हजार करोड़ का विवाद फिर गरमाया! कर्मचारियों की राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची SEBI
सेबी ने सहारा इंडिया कमर्शियल कारपोरेशन लिमिटेड (एसआइसीसीएल) के चार प्रबंधकों और कंपनी सेक्रेटरी को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। य ...और पढ़ें
HighLights
सेबी ने सहारा कर्मचारियों को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील।
सुप्रीम कोर्ट 18 जून को इस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करेगा।
यह मामला 1.98 करोड़ निवेशकों के 14,106 करोड़ रुपये फंड से जुड़ा।
नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सहारा इंडिया कमर्शियल कारपोरेशन लिमिटेड (एसआइसीसीएल) के चार प्रबंधकों (मैनेजर्स) और कंपनी सेक्रेटरी को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सेबी ने प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (एसएटी) के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें इन कर्मचारियों को कंपनी के कृत्यों के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया था।
अवकाशकालीन पीठ 18 जून को इस याचिका पर सुनवाई करेगी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहाना की अवकाशकालीन पीठ 18 जून को इस याचिका पर सुनवाई करेगी। एसएटी का फैसला और फंड जुटाने का मामला इससे पहले, नौ मार्च को एसएटी ने एसआइसीसीएल द्वारा साल 1998 से 2008 के बीच 'आप्शनली फुली कनवर्टिबल डिबेंचर्स' (ओएफसीडी) के जरिये अवैध रूप से फंड जुटाने के मामले में सेबी की कार्रवाई को सही ठहराया था।
1.98 करोड़ निवेशकों से 14106 करोड़ रुपये जुटाए
एसएटी ने कंपनी और उसके निदेशकों की अपीलों को खारिज कर दिया था। इसके अनुसार, कंपनी ने इस अवधि के दौरान लगभग 1.98 करोड़ निवेशकों से 14,106 करोड़ रुपये जुटाए थे। कोर्ट ने कंपनी के इस दावे को खारिज कर दिया कि यह एक 'प्राइवेट प्लेसमेंट' था, और इसे 'पब्लिक आफर' माना जो सेबी के अधिकार क्षेत्र में आता है। कर्मचारियों को राहत के खिलाफ सेबी की अपील हालांकि, एसएटी ने चार प्रबंधकों और कंपनी सेक्रेटरी की अपील को स्वीकार करते हुए कहा था कि वे केवल कर्मचारी थे, इसलिए उन्हें कंपनी के कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
एसएटी ने यह भी नोट किया था कि कंपनी सेक्रेटरी ने निदेशकों द्वारा दिए गए 'पावर आफ अटार्नी' के तहत प्रास्पेक्टस पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके लिए मुख्य रूप से निदेशक ही जिम्मेदार हैं। सेबी ने अब इसी राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला अक्टूबर 2018 के सेबी के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें कंपनी को पैसे लौटाने और अधिकारियों को बाजार से प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया गया था।
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