तांगती खड्ड में तबाही पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी किन्नौर तलब
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले में तांगती खड्ड को साफ करने और मलबा हटाने के अपने आदेशों का पालन न होने पर कड़ा संकोच जताया है। डीसी किन्नौर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
Shimla: तांगती खड्ड में तबाही पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी किन्नौर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश
प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले में तांगती खड्ड को साफ करने और मलबा हटाने के अपने आदेशों का पालन न होने पर कड़ा संकोच और नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्रशासन के रवैये को देखते हुए अब सीधे जिले के प्रशासनिक मुखिया को तलब कर जवाब मांगा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले में तांगती खड्ड को साफ करने और मलबा हटाने के अपने आदेशों का पालन न होने पर कड़ा संकोच और नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्रशासन के रवैये को देखते हुए अब सीधे जिले के प्रशासनिक मुखिया को तलब कर जवाब मांगा है। डीसी किन्नौर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद नदी को साफ करने के लिए पर्याप्त मशीनरी क्यों नहीं तैनात की गई। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
अदालत ने पाया कि 16 अक्तूबर 2025 को ही निर्देश दिए गए थे कि साइट पर सिर्फ एक जेसीबी से काम नहीं चलेगा और डीसी किन्नौर को ज्यादा मशीनें तैनात करने के आदेश दिए गए थे। हालांकि, हाल ही में लोक निर्माण विभाग रामपुर सर्कल के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर की ओर से दाखिल हलफनामे से साफ हुआ कि सितंबर 2025 में सिर्फ एक निजी पोकलेन को केवल 40 घंटों के लिए इस्तेमाल किया गया था। कोर्ट ने कहा कि साल भर में स्थिति और खराब हो गई है, जो सीधे तौर पर अदालती आदेशों की अवहेलना है। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ने अदालत के समक्ष 9 और 10 जुलाई को आई हालिया अचानक आई बाढ़ की तस्वीरें पेश की। इन तस्वीरों को देखकर कोर्ट ने चिंता जताई कि मलबा न हटाने के कारण पुल पूरी तरह से मलबे में दबकर डूब गया है और खड्ड के किनारे बनी इमारतों के ढहने का खतरा पैदा हो गया है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
डिजिटल तकनीक के माध्यम से कानून को लोगों तक पहुँचाने की चुनौती

बृजभूषण शरण सिंह मामले में अदालत ने क्यों माना आरोप झूठे?

बस्तर में 12 सितंबर को नेशनल लोक अदालत की तैयारियां की गईं

ट्रांसजेंडर योजना और लोक अदालत के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष कार्यक्रम

मेटा के लिए भारतीय कानून का सख्त निर्देश: सीसीएएम और सिंथेटिक कंटेंट पर कार्रवाई की बातचीत

विदेशी फंडिंग के नए नियमों पर भारत-अमेरिका में बढ़ता तनाव

सीमा सुरक्षा बलों को कानूनी जागरूकता अभियान में शामिल करने के लिए प्रतिनिधि का प्रस्ताव

सिर्फ ग्लोबल पॉलिसी से नहीं, भारतीय कानून से मेटा को भी कैसा पालन?
ताज़ा ख़बरें
- मेटा को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा: सरकार
- विदेशी चंदे पर कानून: कब और क्यों बना, कितनी बार बदला?
- सुप्रीम कोर्ट ने बैंक-बिल्डर गठजोड़ पर कसा दांव, क्या है इसका मतलब?
- बाढ़ का कहर जारी, E20 पेट्रोल पर बड़ा अपडेट
- E20 पेट्रोल में मिलावट के दावे की पुष्टि नहीं, तेल कंपनियों की सफाई
- जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज, अदालत ने आरोपी को जेल भेजा
- वियतनाम में कमोडिटी डेरिवेटिव्स के लिए एक केंद्रीकृत और आधुनिक विनियमन
- दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी का नया कानून, 25% सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए होंगी आरक्षित

