सिरमौर में घरेलू हिंसा मामला: अदालत ने याचिका खारिज कर दी, सुरक्षित आवास की मांग होने पर भी नहीं मिला न्याय
महिला ने आरोप लगाया कि उसका पति उसके साथ मारपीट करता था, मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था और उसका भरण-पोषण नहीं करता था। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि महिला ने 7 साल से मायके में रहने की जानकारी दी, लेकिन घटना की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र गवाह या साक्ष्य पेश नहीं किए गए।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Sirmour News: अदालत
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घरेलू हिंसा के आरोप साबित नहीं कर सकी
महिला, अदालत ने याचिका की खारिज
- सात वर्षों से मायके में रह रही थी पत्नी, आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए
संवाद न्यूज एजेंसी।
नाहन (सिरमौर)। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता महिला अपने पति के खिलाफ लगाए गए घरेलू हिंसा के आरोपों को विश्वसनीय साक्ष्यों से सिद्ध नहीं कर सकी।
याचिकाकर्ता रक्षा देवी ने आरोप लगाया था कि उसका पति गगन सिंह शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था। मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था तथा उसके भरण-पोषण का खर्च भी नहीं देता था। महिला ने अदालत से सुरक्षा, निवास, भरण-पोषण और मुआवजे सहित विभिन्न राहतें देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि महिला पिछले सात वर्षों से मायके में रह रही थी। उसने 10 दिसंबर 2019 को मायके में हुई मारपीट की घटना का जिक्र किया, लेकिन इस घटना की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र गवाह या अन्य ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए।
अदालत ने यह भी माना कि महिला अपने स्वास्थ्य संबंधी दावों के समर्थन में भी कोई चिकित्सीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने आदेश में कहा कि केवल आरोप लगाने से घरेलू हिंसा सिद्ध नहीं होती, बल्कि उसके समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य भी आवश्यक हैं।-- -- -- --
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महिला, अदालत ने याचिका की खारिज
- सात वर्षों से मायके में रह रही थी पत्नी, आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए
संवाद न्यूज एजेंसी।
नाहन (सिरमौर)। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता महिला अपने पति के खिलाफ लगाए गए घरेलू हिंसा के आरोपों को विश्वसनीय साक्ष्यों से सिद्ध नहीं कर सकी।
याचिकाकर्ता रक्षा देवी ने आरोप लगाया था कि उसका पति गगन सिंह शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था। मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था तथा उसके भरण-पोषण का खर्च भी नहीं देता था। महिला ने अदालत से सुरक्षा, निवास, भरण-पोषण और मुआवजे सहित विभिन्न राहतें देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि महिला पिछले सात वर्षों से मायके में रह रही थी। उसने 10 दिसंबर 2019 को मायके में हुई मारपीट की घटना का जिक्र किया, लेकिन इस घटना की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र गवाह या अन्य ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए।
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अदालत ने यह भी माना कि महिला अपने स्वास्थ्य संबंधी दावों के समर्थन में भी कोई चिकित्सीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने आदेश में कहा कि केवल आरोप लगाने से घरेलू हिंसा सिद्ध नहीं होती, बल्कि उसके समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य भी आवश्यक हैं।
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