होममुकदमेसिरमौर में घरेलू हिंसा मामला: अदालत ने याचिका खारिज कर दी, सुरक्षित आवास की मांग होने पर भी नहीं मिला न्याय
मुकदमे

सिरमौर में घरेलू हिंसा मामला: अदालत ने याचिका खारिज कर दी, सुरक्षित आवास की मांग होने पर भी नहीं मिला न्याय

महिला ने आरोप लगाया कि उसका पति उसके साथ मारपीट करता था, मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था और उसका भरण-पोषण नहीं करता था। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि महिला ने 7 साल से मायके में रहने की जानकारी दी, लेकिन घटना की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र गवाह या साक्ष्य पेश नहीं किए गए।

5 जुलाई 2026 को 07:24 pm बजे
सिरमौर में घरेलू हिंसा मामला: अदालत ने याचिका खारिज कर दी, सुरक्षित आवास की मांग होने पर भी नहीं मिला न्याय

सौजन्य से:- Amar Ujala

{"_id":"6a4a573cd835520e48066195","slug":"court-news-1-nahan-news-c-177-1-nhn1017-182619-2026-07-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: अदालत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}

Sirmour News: अदालत

विज्ञापन

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

घरेलू हिंसा के आरोप साबित नहीं कर सकी

महिला, अदालत ने याचिका की खारिज

- सात वर्षों से मायके में रह रही थी पत्नी, आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए

संवाद न्यूज एजेंसी।

नाहन (सिरमौर)। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता महिला अपने पति के खिलाफ लगाए गए घरेलू हिंसा के आरोपों को विश्वसनीय साक्ष्यों से सिद्ध नहीं कर सकी।

याचिकाकर्ता रक्षा देवी ने आरोप लगाया था कि उसका पति गगन सिंह शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था। मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था तथा उसके भरण-पोषण का खर्च भी नहीं देता था। महिला ने अदालत से सुरक्षा, निवास, भरण-पोषण और मुआवजे सहित विभिन्न राहतें देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि महिला पिछले सात वर्षों से मायके में रह रही थी। उसने 10 दिसंबर 2019 को मायके में हुई मारपीट की घटना का जिक्र किया, लेकिन इस घटना की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र गवाह या अन्य ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए।

अदालत ने यह भी माना कि महिला अपने स्वास्थ्य संबंधी दावों के समर्थन में भी कोई चिकित्सीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने आदेश में कहा कि केवल आरोप लगाने से घरेलू हिंसा सिद्ध नहीं होती, बल्कि उसके समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य भी आवश्यक हैं।-- -- -- --

विज्ञापन

विज्ञापन

महिला, अदालत ने याचिका की खारिज

- सात वर्षों से मायके में रह रही थी पत्नी, आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए

संवाद न्यूज एजेंसी।

नाहन (सिरमौर)। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता महिला अपने पति के खिलाफ लगाए गए घरेलू हिंसा के आरोपों को विश्वसनीय साक्ष्यों से सिद्ध नहीं कर सकी।

याचिकाकर्ता रक्षा देवी ने आरोप लगाया था कि उसका पति गगन सिंह शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था। मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था तथा उसके भरण-पोषण का खर्च भी नहीं देता था। महिला ने अदालत से सुरक्षा, निवास, भरण-पोषण और मुआवजे सहित विभिन्न राहतें देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि महिला पिछले सात वर्षों से मायके में रह रही थी। उसने 10 दिसंबर 2019 को मायके में हुई मारपीट की घटना का जिक्र किया, लेकिन इस घटना की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र गवाह या अन्य ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश नहीं किए गए।

विज्ञापन

अदालत ने यह भी माना कि महिला अपने स्वास्थ्य संबंधी दावों के समर्थन में भी कोई चिकित्सीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने आदेश में कहा कि केवल आरोप लगाने से घरेलू हिंसा सिद्ध नहीं होती, बल्कि उसके समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य भी आवश्यक हैं।

विज्ञापन

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन
मुकदमे

बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी
मुकदमे

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई
मुकदमे

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
मुकदमे

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी
मुकदमे

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद
मुकदमे

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता
मुकदमे

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत

ताज़ा ख़बरें